×
 

श्रावण मास के स्वागत में शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, देशभर में गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे

श्रावण मास के शुभारंभ पर देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने भगवान शिव की पूजा, अभिषेक, व्रत और कांवड़ यात्रा की तैयारियों के साथ आस्था व्यक्त की।

पवित्र श्रावण (सावन) मास के शुभारंभ पर पूरे देश में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। सुबह से ही देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने भगवान शिव के दर्शन कर सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसरों में "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो गया।

देशभर के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं ने शिवलिंग का दुग्धाभिषेक, जलाभिषेक और पंचामृत से अभिषेक किया। भगवान शिव को दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल तथा पवित्र बेलपत्र अर्पित किए गए। धार्मिक मान्यता के अनुसार बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इसके अर्पण से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

हिंदू पंचांग का पाँचवाँ महीना श्रावण भगवान शिव की आराधना को समर्पित माना जाता है। यह महीना वर्षा ऋतु के दौरान आता है और इसे हिंदू धर्म के सबसे पवित्र महीनों में गिना जाता है। इस अवधि में करोड़ों श्रद्धालु व्रत, पूजा-अर्चना, मंदिर दर्शन और तीर्थयात्रा के माध्यम से भगवान शिव की उपासना करते हैं।

और पढ़ें: तेलंगाना में 12वीं के छात्र ने की आत्महत्या, कम अंक पर कथित अपमान और थप्पड़ मारने का शिक्षक पर आरोप

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्रावण मास में समुद्र मंथन हुआ था। इस दौरान निकले विष से सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण किया, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। इसके अलावा माता पार्वती द्वारा भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए किए गए कठोर तप का भी संबंध इसी महीने से माना जाता है। इसलिए यह माह वैवाहिक सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना के लिए विशेष शुभ माना जाता है।

श्रावण मास में श्रद्धालु विशेष रूप से सोमवार का व्रत रखते हैं, जिसे सोमवारी व्रत कहा जाता है। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से किए गए इस व्रत और पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी महीने से कांवड़ यात्रा भी प्रारंभ होती है, जिसमें कांवड़िये गंगा से पवित्र जल लाकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। अनेक श्रद्धालु पूरे महीने सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं तथा मांसाहार और अन्य तामसिक पदार्थों से परहेज कर धार्मिक अनुशासन का पालन करते हैं।

और पढ़ें: मेटा का मुनाफा अनुमान से कम, भारी एआई निवेश की रणनीति बरकरार

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share