पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची संशोधन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की दखल, न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची विशेष संशोधन विवाद पर हस्तक्षेप कर जिला जज स्तर के अधिकारियों से दावों-आपत्तियों की सुनवाई कराने का निर्देश दिया।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच जारी गतिरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया है। 20 फरवरी को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में यह तय करना लगभग असंभव है कि किस पक्ष द्वारा किस रैंक के अधिकारियों की तैनाती की जानी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि वे जिला जज या अतिरिक्त जिला जज स्तर के वर्तमान अथवा सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति करें। ये अधिकारी मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने से जुड़े लंबित दावों और आपत्तियों की सुनवाई करेंगे, विशेषकर उन मामलों में जहां “तार्किक विसंगतियां” सामने आई हैं।
प्रक्रिया को तेज करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और राज्य चुनाव आयुक्त को निर्देश दिया कि वे कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से बैठक करें। इस बैठक में महाधिवक्ता और सॉलिसिटर जनरल की उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाए, ताकि 28 फरवरी तक एसआईआर प्रक्रिया को यथासंभव पूरा करने की रूपरेखा तैयार की जा सके।
अदालत ने स्पष्ट किया कि 21 फरवरी को जारी होने वाली मसौदा या अंतिम मतदाता सूची को अंतिम नहीं माना जाएगा। यदि सुनवाई के बाद संशोधन आवश्यक हों, तो चुनाव आयोग पूरक सूची जारी कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के इस कदम को चुनावी पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर पश्चिम बंगाल जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में।
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