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पश्चिम बंगाल में अधिकारियों के तबादले पर याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने कानून का सवाल खुला रखा

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में अधिकारियों के तबादलों पर दायर याचिका में कानून का प्रश्न खुला रखा, लेकिन हस्तक्षेप से इनकार करते हुए मामले की सुनवाई जारी रखी।

पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के तबादलों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि इस मामले में उठाया गया कानून का प्रश्न खुला रहेगा। हालांकि अदालत ने याचिका पर तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

यह याचिका कलकत्ता उच्च न्यायालय के 31 मार्च के उस आदेश को चुनौती देती थी, जिसमें चुनाव आयोग द्वारा अधिकारियों के तबादले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी गई थी। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि बड़ी संख्या में अधिकारियों का तबादला अपने आप में मनमाना या दुर्भावनापूर्ण नहीं माना जा सकता।

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि राज्य में 79 अधिकारियों—जिनमें 63 पुलिस कर्मी और 16 प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं—का तबादला किया गया है। उनका आरोप था कि इससे प्रशासन में खालीपन पैदा हुआ है।

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चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि उसके पास निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित कराने के लिए कानूनी अधिकार हैं और तबादलों में किसी तरह की मनमानी नहीं की गई है। आयोग ने यह भी कहा कि अन्य राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और झारखंड में भी इसी तरह तबादले हुए हैं।

राज्य सरकार ने याचिकाकर्ता के पक्ष का समर्थन किया, जबकि आयोग ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता सार्वजनिक हित में याचिका दाखिल करने योग्य नहीं हैं।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी से अलग रखा गया है, जबकि कुछ को अन्य राज्यों में पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है, जिससे दोहरी नीति अपनाई जा रही है।

इस मामले में विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को होने हैं, जबकि मतगणना 4 मई को निर्धारित है।

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