शेख हसीना का बड़ा दावा- इसी साल लौटूंगी बांग्लादेश, लोकतंत्र की बहाली तक जारी रहेगा संघर्ष
शेख हसीना ने दावा किया कि वह इसी वर्ष बांग्लादेश लौटेंगी। उन्होंने लोकतंत्र बहाली, अवामी लीग पर प्रतिबंध, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और वर्तमान सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए।
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने निर्वासन के दौरान दिए एक विशेष ईमेल साक्षात्कार में दावा किया है कि वह इसी वर्ष हर हाल में बांग्लादेश लौटेंगी। उन्होंने कहा कि उनकी वापसी किसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के लिए नहीं, बल्कि देश में लोकतंत्र, कानून के शासन और नागरिकों के राजनीतिक अधिकारों की बहाली के उद्देश्य से होगी।
शेख हसीना ने अपने खिलाफ आए फैसलों को राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए आरोप लगाया कि न्यायपालिका का इस्तेमाल अवामी लीग को नेतृत्वविहीन करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें मौत का कोई डर नहीं है। उन्होंने कहा, "1975 में मैंने अपने माता-पिता, भाइयों और लगभग पूरे परिवार को खो दिया था। मुझ पर ग्रेनेड हमला भी हुआ, लेकिन मैं हर चुनौती का सामना करती रही हूं।"
उन्होंने कहा कि अवामी लीग कोई कागजी संगठन नहीं, बल्कि 77 वर्षों से बांग्लादेश की जनता से जुड़ी एक मजबूत राजनीतिक पार्टी है। उनके अनुसार, पार्टी पर पहले भी कई बार प्रतिबंध लगाए गए, नेताओं की हत्या हुई और दमन हुआ, लेकिन हर बार पार्टी और अधिक मजबूत होकर उभरी।
वर्तमान राजनीतिक हालात पर टिप्पणी करते हुए शेख हसीना ने आरोप लगाया कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार और उसके बाद बीएनपी के शासन में लोकतंत्र, कानून का राज और नागरिकों की सुरक्षा कमजोर हुई है। उन्होंने दावा किया कि देश में उग्रवाद बढ़ा है और अवामी लीग के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं पर अत्याचार किए जा रहे हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध, ईसाई, आदिवासी और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने मंदिरों, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक संस्थानों पर हमलों का भी उल्लेख किया।
भारत में अपने निर्वासन पर बोलते हुए शेख हसीना ने कहा कि उनका दिल आज भी बांग्लादेश में बसता है। उन्होंने कहा कि वह दूर रहकर भी देश की स्थिति पर नजर रख रही हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने लोकतंत्र तथा मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दे लगातार उठा रही हैं। उन्होंने दोहराया कि लोकतंत्र की बहाली तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।