एसआईआर में संदिग्ध मतदाता से मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित पद्मश्री तक: गुजरात में मीर हाजी कासम की 15 दिन की कहानी
मतदाता सूची में नाम पर आपत्ति से लेकर पद्मश्री और मुख्यमंत्री द्वारा सम्मान तक, ढोलक वादक मीर हाजी कासम के जीवन के 15 दिन गुजरात में चर्चा का केंद्र बने।
गुजरात के प्रसिद्ध ढोलक वादक मीर हाजी कासम उर्फ हाजी रमाकड़ू उर्फ हाजी राठौड़ के जीवन के पिछले 15 दिन बेहद घटनापूर्ण रहे। इन कुछ ही दिनों में वे मतदाता सूची में “संदिग्ध” बताए जाने से लेकर देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री पाने और मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किए जाने तक का सफर तय कर गए।
13 जनवरी को जूनागढ़ नगर निगम के भाजपा पार्षद संजय मनवर ने राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन – SIR) अभियान के तहत अपने वार्ड की मतदाता सूची में मीर हाजी कासम के नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई थी। इस आपत्ति के बाद कासम का नाम चर्चा में आ गया और मामला राजनीतिक तथा सामाजिक बहस का विषय बन गया।
इसके ठीक 12 दिन बाद, 25 जनवरी को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा की। इस सूची में मीर हाजी कासम का नाम पद्मश्री पुरस्कार के लिए शामिल किया गया। कासम को यह सम्मान भारतीय लोक संगीत, विशेषकर ढोलक वादन में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया।
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28 जनवरी को इस घटनाक्रम ने एक और मोड़ लिया, जब गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में मीर हाजी कासम को सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में वही भाजपा पार्षद संजय मनवर भी मौजूद थे, जिन्होंने कुछ दिन पहले कासम के नाम पर मतदाता सूची में आपत्ति जताई थी। दोनों की एक साथ तस्वीर सामने आने के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया।
मीर हाजी कासम वर्षों से लोक संगीत के क्षेत्र में सक्रिय हैं और उन्होंने अपनी कला के जरिए गुजरात की सांस्कृतिक विरासत को देश-विदेश तक पहुंचाया है। उनका यह सफर न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कला और योगदान की पहचान अंततः सामने आती है।
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