सूर्य के ऊपरी वायुमंडल की तेज़ घूर्णन गति का खुलासा, वैज्ञानिकों की खोज ने पारंपरिक भौतिकी को दी चुनौती
वैज्ञानिकों ने पाया कि सूर्य का ऊपरी वायुमंडल उसकी सतह से अधिक तेज़ घूमता है। यह खोज पारंपरिक भौतिकी को चुनौती देते हुए अंतरिक्ष मौसम की भविष्यवाणी बेहतर बनाएगी।
वैज्ञानिकों ने सूर्य के ऊपरी वायुमंडल को लेकर एक ऐसी महत्वपूर्ण खोज की है, जिसने पारंपरिक भौतिकी के लंबे समय से प्रचलित सिद्धांतों को चुनौती दी है। नए अध्ययन में पाया गया है कि सूर्य का ऊपरी वायुमंडल उसकी दिखाई देने वाली सतह की तुलना में कहीं अधिक तेज़ गति से घूमता है। इतना ही नहीं, सूर्य की सतह से ऊंचाई बढ़ने के साथ इसकी घूर्णन गति भी लगातार बढ़ती जाती है।
यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका 'एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स लेटर्स' में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज से सूर्य की आंतरिक गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम (स्पेस वेदर) को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। इससे पृथ्वी पर उपग्रहों, संचार प्रणालियों, नेविगेशन नेटवर्क और बिजली अवसंरचना पर पड़ने वाले प्रभावों का अधिक सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा।
यह अध्ययन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एरीज) ने उदयपुर सौर वेधशाला (यूएसओ), भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) तथा अहमदनगर कॉलेज के सहयोग से किया। शोध में एरीज के सृंजना राउत और वैभव पंत (वर्तमान में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली), यूएसओ-पीआरएल की अंशु कुमारी तथा अहमदनगर कॉलेज के जयदीप कंदेकर शामिल रहे।
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शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए जापान स्थित नोबेयामा रेडियोहेलियोग्राफ से प्राप्त प्रेक्षणों का उपयोग किया। अध्ययन के अनुसार, सूर्य का व्यवहार कोणीय संवेग संरक्षण (लॉ ऑफ कंजर्वेशन ऑफ एंगुलर मोमेंटम) के पारंपरिक सिद्धांत से मेल नहीं खाता। सामान्यतः यह सिद्धांत बताता है कि कोई घूमती हुई वस्तु, जैसे बर्फ पर घूमने वाला स्केटर, अपने हाथ भीतर खींचने पर तेज़ और बाहर फैलाने पर धीमी गति से घूमता है। पृथ्वी के वायुमंडल पर भी यही सिद्धांत व्यापक रूप से लागू होता है।
हालांकि, वैज्ञानिकों ने पाया कि सूर्य का वायुमंडल इस नियम से अलग व्यवहार करता है। अध्ययन में सामने आया कि सूर्य के ऊपरी वायुमंडल की घूर्णन गति उसकी दृश्य सतह से अधिक है और ऊंचाई बढ़ने के साथ यह गति और तेज़ होती जाती है। शोध में यह भी पाया गया कि जब सूर्य पर सौर धब्बों (सनस्पॉट्स) की संख्या बढ़ती है और सौर गतिविधियां अधिक होती हैं, तब उसकी घूर्णन गति में हल्की कमी दर्ज की जाती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, सूर्य मुख्य रूप से गैसों से बना है और उसकी कोई ठोस सतह नहीं है। यही कारण है कि उसकी वास्तविक घूर्णन गति का सटीक मापन हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है।
इस चुनौती से निपटने के लिए शोधकर्ताओं ने द्वि-आयामी इमेज कोरिलेशन तकनीक का उपयोग किया। इस तकनीक के तहत अलग-अलग दिनों में ली गई सूर्य की तस्वीरों के समान हिस्सों की तुलना कर उनमें मौजूद संरचनाओं के विस्थापन का विश्लेषण किया गया। इसी आधार पर सूर्य के वायुमंडल की घूर्णन गति का निर्धारण किया गया।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज सूर्य के वायुमंडल की जटिल गतिशीलता को समझने में नई दिशा प्रदान करेगी। साथ ही, इससे भविष्य में सौर गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम की अधिक सटीक भविष्यवाणी संभव होगी, जिससे पृथ्वी पर महत्वपूर्ण तकनीकी अवसंरचनाओं को संभावित प्रभावों से बचाने की तैयारियों को और बेहतर बनाया जा सकेगा।
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