सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु नगर निकाय चुनाव के लिए 30 जून की समय-सीमा तय की
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि बेंगलुरु की बीबीएमपी के चुनाव 30 जून 2026 तक पूरे किए जाएं, ताकि शहरी शासन में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल हो सके।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (12 जनवरी, 2026) को बेंगलुरु की नगर निकाय संस्था बृहद बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) के चुनावों को लेकर एक अहम आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि बीबीएमपी के लिए चुनावी प्रक्रिया हर हाल में 30 जून, 2026 तक पूरी कर ली जानी चाहिए। अदालत ने इसे एक “महत्वपूर्ण और अनिवार्य प्रक्रिया” बताते हुए राज्य सरकार को समय-सीमा का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार ने दलील दी कि हाई कोर्ट के हालिया फैसले के कारण भारत के सबसे बड़े और सबसे अधिक महानगरीय शहरों में से एक बेंगलुरु में शहरी शासन को बेहतर बनाने के प्रयास बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। राज्य का कहना था कि परिसीमन और आरक्षण से जुड़े मुद्दों के कारण चुनाव प्रक्रिया में देरी हुई, लेकिन इसका उद्देश्य प्रशासनिक सुधार और बेहतर शहरी प्रबंधन सुनिश्चित करना था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचित नगर निकायों का होना बेहद जरूरी है और लंबे समय तक चुनाव टालना संविधान की भावना के खिलाफ है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि बीबीएमपी जैसे बड़े नगर निकाय का निर्वाचित प्रतिनिधियों के बिना संचालन न केवल नागरिक सुविधाओं को प्रभावित करता है, बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता पर भी असर डालता है।
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बेंगलुरु का कर्नाटक की राजनीति और अर्थव्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। शहर कर्नाटक विधानसभा की कुल सीटों में से लगभग 12.5 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है और राज्य के वार्षिक राजस्व में 60 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है। ऐसे में यहां प्रभावी और जवाबदेह शहरी शासन की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को बेंगलुरु के नागरिक प्रशासन में लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि तय समय-सीमा का पालन नहीं किया गया, तो आगे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
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