पेन्नैयार नदी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र को ट्रिब्यूनल गठन का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने पेन्नैयार नदी जल विवाद पर केंद्र को एक महीने में ट्रिब्यूनल गठित करने का आदेश दिया, ताकि तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच विवाद का समाधान हो सके।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच पेन्नैयार नदी के जल बंटवारे को लेकर चल रहे लंबे विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सोमवार, 2 फरवरी 2026 को शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह इस अंतर-राज्यीय जल विवाद के समाधान के लिए एक विशेष ट्रिब्यूनल का गठन करे।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह एक महीने के भीतर अधिसूचना जारी कर अंतर-राज्यीय जल विवाद ट्रिब्यूनल का गठन सुनिश्चित करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि जल विवादों के निपटारे के लिए संवैधानिक और वैधानिक व्यवस्था मौजूद है और ऐसे मामलों में ट्रिब्यूनल का गठन अनिवार्य है।
पेन्नैयार नदी दक्षिण भारत की एक महत्वपूर्ण नदी है, जो कर्नाटक से निकलकर तमिलनाडु के कई जिलों से होकर बहती है। इस नदी के जल उपयोग को लेकर दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। तमिलनाडु का आरोप है कि कर्नाटक द्वारा ऊपरी क्षेत्रों में बनाए गए बांधों और जल परियोजनाओं के कारण उसे पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे खेती और पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। वहीं, कर्नाटक का कहना है कि वह अपने राज्य की आवश्यकताओं के अनुसार जल संसाधनों का उपयोग कर रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अंतर-राज्यीय नदियों के जल बंटवारे से जुड़े विवादों का समाधान न्यायसंगत और संतुलित तरीके से होना चाहिए, ताकि किसी भी राज्य के हितों को नुकसान न पहुंचे। अदालत के निर्देश के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि ट्रिब्यूनल के गठन से दोनों राज्यों के बीच चले आ रहे इस विवाद का कानूनी और स्थायी समाधान निकल सकेगा।
यह फैसला न केवल तमिलनाडु और कर्नाटक के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि अन्य अंतर-राज्यीय जल विवादों के लिए भी एक मिसाल माना जा रहा है।
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