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सुप्रीम कोर्ट ने मुकुल रॉय की विधानसभा सदस्यता रद्द करने के आदेश पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने एआई युग में वीडियो साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए मुकुल रॉय की विधानसभा सदस्यता रद्द करने के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (16 जनवरी, 2026) को पश्चिम बंगाल विधानसभा से मुकुल रॉय की अयोग्यता से जुड़े मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। यह आदेश 13 नवंबर 2025 को पारित किया गया था, जिसमें मुकुल रॉय को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल होने के आधार पर दल-बदल का दोषी मानते हुए विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराया गया था।

यह मामला एक कथित वीडियो क्लिप पर आधारित था, जिसमें मुकुल रॉय को राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में देखा गया था। इसी वीडियो को आधार बनाकर हाईकोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला था कि मुकुल रॉय ने दल-बदल कानून का उल्लंघन किया है।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची शामिल थे, ने इस आदेश पर रोक लगाते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा, “इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में किसी का भी चेहरा वीडियो में इस्तेमाल किया जा सकता है।” अदालत की इस टिप्पणी को वीडियो साक्ष्य की विश्वसनीयता पर एक अहम सवाल के तौर पर देखा जा रहा है।

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सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल, जो पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी की ओर से पेश हो रहे थे, ने वीडियो क्लिप को प्रमाण मानने का आग्रह किया। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने उनकी आपत्तियों को दरकिनार करते हुए कहा कि मौजूदा तकनीकी युग में वीडियो साक्ष्यों की सत्यता की गहन जांच आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से मुकुल रॉय को फिलहाल बड़ी राहत मिली है और उनकी विधानसभा सदस्यता बरकरार रहेगी, जब तक कि मामले में आगे अंतिम फैसला नहीं आ जाता। यह मामला देश में दल-बदल कानून और डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

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