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भारत-पाक तनाव रोकने का फिर दावा: ट्रंप बोले, नोबेल के सबसे बड़े हकदार मैं, ओबामा ने कुछ नहीं किया

डोनाल्ड ट्रंप ने फिर भारत-पाक संघर्ष रोकने का दावा करते हुए खुद को नोबेल शांति पुरस्कार का सबसे बड़ा हकदार बताया और ओबामा पर “कुछ नहीं करने” का आरोप लगाया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित संघर्ष को रोककर लाखों जानें बचाईं और कहा कि इतिहास में उनसे ज्यादा नोबेल शांति पुरस्कार का हकदार कोई नहीं है। इस दौरान उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर भी तीखा हमला किया और कहा कि ओबामा को नोबेल पुरस्कार मिला, जबकि उन्होंने “कुछ भी नहीं किया।”

शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को व्हाइट हाउस में तेल और गैस कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने यह टिप्पणी की। बैठक में वे वेनेजुएला के तेल भंडार से जुड़ी योजनाओं पर चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने यह भी दोहराया कि पिछले साल मई में भारत-पाक तनाव के दौरान “आठ लड़ाकू विमान मार गिराए गए”, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि ये विमान किस देश के थे।

ट्रंप ने कहा, “चाहे लोग ट्रंप को पसंद करें या न करें, मैंने आठ बड़े युद्ध सुलझाए। कुछ 36 साल, 32 साल, 31 साल से चल रहे थे। भारत और पाकिस्तान जैसे युद्ध तो शुरू होने ही वाले थे, जहां पहले ही आठ जेट गिराए जा चुके थे।”

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उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ, जो पिछले साल व्हाइट हाउस आए थे, ने उन्हें दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच संघर्ष रोकने का श्रेय दिया और कहा कि इससे लाखों जानें बचीं।

ट्रंप ने भारत-पाक संघर्ष रोकने का श्रेय खुद को दिया है। वह मई 10, 2025 के बाद से कई बार यह दावा कर चुके हैं, जब उन्होंने सोशल मीडिया पर “पूर्ण और तत्काल” संघर्षविराम की घोषणा की थी। हालांकि भारत लगातार किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार करता रहा है।

भारत ने 7 मई 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था, जिसमें पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।

ट्रंप ने आगे कहा कि उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल के आठ महीनों में आठ युद्ध रोके हैं, इसलिए उनसे बड़ा नोबेल शांति पुरस्कार का हकदार कोई नहीं। उन्होंने ओबामा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 2009 में पद संभालते ही उन्हें नोबेल मिल गया, जबकि वे “खराब राष्ट्रपति” थे और उन्हें खुद नहीं पता कि पुरस्कार क्यों मिला।

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