अंतरराष्ट्रीय कानून की जरूरत नहीं, सिर्फ मेरी नैतिकता काफी: ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय कानून को नकारते हुए अपनी नैतिकता को सर्वोपरि बताया, जिस पर संयुक्त राष्ट्र और विशेषज्ञों ने वैश्विक अस्थिरता और साम्राज्यवाद की वापसी की चेतावनी दी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय कानून को खुले तौर पर खारिज करते हुए कहा है कि दुनिया भर में उनकी आक्रामक नीतियों पर अंकुश लगाने के लिए उनकी “अपनी नैतिकता” ही पर्याप्त है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सेना द्वारा अगवा किए जाने को लेकर अमेरिका की तीखी आलोचना हो रही है।
ट्रंप ने गुरुवार को एक साक्षात्कार में कहा, “मुझे अंतरराष्ट्रीय कानून की जरूरत नहीं है। मेरा मकसद लोगों को नुकसान पहुंचाना नहीं है।” जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना चाहिए, तो उन्होंने कहा कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि अंतरराष्ट्रीय कानून की परिभाषा क्या मानी जाती है।
ट्रंप ने अपने विदेश नीति लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अमेरिकी सैन्य ताकत के इस्तेमाल की इच्छा बार-बार जताई है। शनिवार तड़के अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला किया, जिसमें राजधानी कराकास और सैन्य ठिकानों पर धमाकों की खबरें आईं। इसके बाद अमेरिकी सैनिकों ने राष्ट्रपति मादुरो को हिरासत में ले लिया, जिसे आलोचकों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन बताया है।
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हमले के बाद ट्रंप ने कहा कि अमेरिका वेनेजुएला को “चलाएगा” और उसके विशाल तेल संसाधनों का इस्तेमाल करेगा। हालांकि प्रशासन ने अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के साथ सहयोग की बात भी कही, लेकिन साथ ही नीति “थोपने” और मांगें न मानने पर दोबारा सैन्य कार्रवाई की धमकी दी।
संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत मार्गरेट सैटरथवेट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून को नकारना बेहद खतरनाक है और दुनिया “साम्राज्यवाद के दौर” में लौट सकती है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि “जिसकी ताकत, उसकी सही” की सोच चीन और रूस जैसे देशों को भी आक्रामक कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।
राजनीतिक वैज्ञानिक इयान हर्ड ने कहा कि लैटिन अमेरिका में अमेरिकी हस्तक्षेप का इतिहास अस्थिरता और मानवाधिकार उल्लंघनों से भरा रहा है और ऐसे कदम अंततः कभी सफल नहीं हुए।
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