डोनाल्ड ट्रंप का दावा: ईरान से अमेरिका और मध्य पूर्व को विशाल खतरा, परमाणु मंसूबे कुचलने की कसम
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान का मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम अमेरिका व मध्य पूर्व के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने तेहरान के परमाणु मंसूबे कुचलने की कसम खाई।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर किए गए हमलों का बचाव करते हुए कहा कि तेहरान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम अमेरिका और मध्य पूर्व के लिए “विशाल खतरा” बन चुका था। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान अपनी परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिशों को छिपाने के लिए मिसाइल कार्यक्रम का इस्तेमाल कर रहा था।
ट्रंप ने कहा कि ईरान की लंबी दूरी की मिसाइलें यूरोप और अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक पहुंचने में सक्षम थीं और जल्द ही अमेरिका तक मार करने की क्षमता हासिल कर लेतीं। उनके मुताबिक, इस तेजी से बढ़ते मिसाइल कार्यक्रम का उद्देश्य परमाणु हथियार विकास को सुरक्षा कवच देना था, जिससे उसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता।
उन्होंने दोहराया कि वह कभी भी ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देंगे। ट्रंप ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए परमाणु समझौते को खत्म करना उनके लिए गर्व की बात थी। उनका दावा था कि यदि वह समझौता जारी रहता तो ईरान तीन साल पहले ही परमाणु हथियार हासिल कर लेता।
ईरानी शासन को “बीमार” और “षड्यंत्रकारी” बताते हुए ट्रंप ने कहा कि पिछले 47 वर्षों से तेहरान अमेरिका पर हमले करता रहा है। उन्होंने कहा कि हमलों में ईरान के 10 जहाज नष्ट कर दिए गए और उन्हें समुद्र में डुबो दिया गया।
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना ईरान की मिसाइल क्षमताओं को नष्ट कर रही है और उसकी नौसेना को कमजोर कर रही है। उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि आतंकवाद को समर्थन देने वाला देश कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
साथ ही, ट्रंप ने सैन्य अभियान में मारे गए चार अमेरिकी सैनिकों की मौत पर शोक व्यक्त किया और कहा कि उनकी स्मृति में यह मिशन जारी रहेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली अमेरिकी सेना इस लड़ाई में जीत हासिल करेगी।
और पढ़ें: ह्यूमन राइट्स वॉच की चेतावनी: अमेरिका तानाशाही की ओर बढ़ रहा