ट्रंप का दावा: व्हाइट हाउस बैठक से पहले वेनेजुएला के लिए अमेरिकी तेल कंपनियों ने 100 अरब डॉलर निवेश का वादा किया
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी तेल कंपनियों ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्र के पुनर्निर्माण के लिए 100 अरब डॉलर निवेश का वादा किया है, जिससे ऊर्जा और भू-राजनीति में बड़ा बदलाव संभव है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए 100 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है। यह बयान उन्होंने व्हाइट हाउस में शीर्ष तेल उद्योग अधिकारियों के साथ होने वाली बैठक से पहले दिया।
3 जनवरी को अमेरिकी सैन्य बलों ने एक बड़े सैन्य अभियान के तहत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में ले लिया था। ट्रंप ने यह छिपाया नहीं कि इस कार्रवाई के पीछे वेनेजुएला के विशाल तेल संसाधनों पर नियंत्रण एक प्रमुख कारण था।
ट्रंप ने एक साक्षात्कार में कहा, “कम से कम 100 अरब डॉलर का निवेश ‘बिग ऑयल’ द्वारा किया जाएगा, जिनके साथ मैं आज व्हाइट हाउस में बैठक करने वाला हूं।” इस बैठक में ट्रंप का उद्देश्य तेल कंपनियों को वेनेजुएला में अपने योजनाओं के समर्थन के लिए राजी करना था।
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ट्रंप प्रशासन ने कई बार कहा है कि वह वेनेजुएला का संचालन कर रहा है। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने बुधवार (7 जनवरी) को कहा कि वाशिंगटन देश के तेल उद्योग को “अनिश्चितकाल” तक नियंत्रित करेगा। हालांकि, अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने दावा किया कि उनकी सरकार अब भी नियंत्रण में है और सरकारी तेल कंपनी अमेरिका से तेल बिक्री को लेकर बातचीत कर रही है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि वेनेजुएला के “सहयोग” के चलते उन्होंने दूसरे चरण के सैन्य हमले रद्द कर दिए। उन्होंने दावा किया कि देश ने राजनीतिक कैदियों को रिहा करना शुरू कर दिया है और दोनों देश तेल व गैस ढांचे के पुनर्निर्माण पर साथ काम कर रहे हैं।
The Indian Witness के अनुसार, व्हाइट हाउस बैठक में एक्सॉन मोबिल, शेवरॉन और कोनोकोफिलिप्स के प्रमुख शामिल हो सकते हैं। वेनेजुएला के पास दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल भंडार हैं, लेकिन वर्षों के प्रतिबंधों और निवेश की कमी के कारण उत्पादन बुरी तरह गिर चुका है।
ट्रंप इसे अमेरिकी ईंधन कीमतें घटाने के अवसर के रूप में देख रहे हैं, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक अनिश्चितता और भारी लागत के कारण निवेश आसान नहीं होगा।
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