ट्रंप ने अमेरिका को प्रमुख जलवायु संधि और वैज्ञानिक निकाय से बाहर किया: व्हाइट हाउस
राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका को यूएनएफसीसीसी और आईपीसीसी समेत प्रमुख जलवायु निकायों से बाहर किया। इस फैसले से वैश्विक जलवायु सहयोग, विज्ञान और भविष्य की अमेरिकी भागीदारी पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
व्हाइट हाउस ने बुधवार (7 जनवरी 2026) को घोषणा की कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका को एक बुनियादी वैश्विक जलवायु संधि और दुनिया की प्रमुख वैश्विक तापमान आकलन संस्था से बाहर निकाल रहे हैं। यह कदम संयुक्त राष्ट्र प्रणाली से व्यापक दूरी बनाने की उनकी नीति का हिस्सा बताया गया है। व्हाइट हाउस के एक ज्ञापन में कुल 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों को “अमेरिका के हितों के खिलाफ” बताया गया है।
इनमें सबसे प्रमुख है संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी), जो सभी बड़े अंतरराष्ट्रीय जलवायु समझौतों की आधारभूत संधि है। राष्ट्रपति ट्रंप ने घरेलू नीति के स्तर पर जीवाश्म ईंधनों को पूरी तरह समर्थन दिया है और वह खुले तौर पर इस वैज्ञानिक सहमति का मज़ाक उड़ाते रहे हैं कि मानव गतिविधियां पृथ्वी को गर्म कर रही हैं। उन्होंने पिछले सितंबर में संयुक्त राष्ट्र के उच्चस्तरीय शिखर सम्मेलन में जलवायु विज्ञान को “धोखा” तक करार दिया था।
यूएनएफसीसीसी को जून 1992 में रियो अर्थ समिट में अपनाया गया था और उसी वर्ष तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश के कार्यकाल में अमेरिकी सीनेट ने इसे मंजूरी दी थी। अमेरिकी संविधान राष्ट्रपति को सीनेट के दो-तिहाई समर्थन से संधियों में शामिल होने की अनुमति देता है, लेकिन उनसे बाहर निकलने की प्रक्रिया पर स्पष्टता नहीं है, जिससे कानूनी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
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राष्ट्रपति ट्रंप अपने पहले कार्यकाल की तरह ही पेरिस जलवायु समझौते से भी अमेरिका को बाहर निकाल चुके हैं, जिसे बाद में डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति जो बाइडेन ने दोबारा जॉइन कराया था। अब मूल संधि से बाहर निकलने से भविष्य में किसी भी पुनः प्रवेश पर और कानूनी अनिश्चितता बढ़ सकती है।
यूनियन ऑफ कंसर्न्ड साइंटिस्ट्स की रैचेल क्लीटस ने इस फैसले को “नया निचला स्तर” बताते हुए कहा कि यह प्रशासन विज्ञान विरोधी है और वैश्विक सहयोग को कमजोर कर रहा है। ज्ञापन में अंतर-सरकारी जलवायु परिवर्तन पैनल (आईपीसीसी), अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी, यूएन ओशन्स और यूएन वाटर से भी बाहर निकलने का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन ने यूनेस्को, विश्व स्वास्थ्य संगठन से भी अमेरिका को बाहर किया है और विदेशी सहायता में कटौती करते हुए कई संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की फंडिंग घटा दी है। इनमें शरणार्थी उच्चायुक्त और विश्व खाद्य कार्यक्रम भी शामिल हैं। ट्रंप ने सितंबर में महासभा को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र पर तीखा हमला बोला था और कहा था कि यह अपनी क्षमता के अनुरूप काम नहीं कर पा रहा है।