नीट पर संसदीय समिति की बैठक से बाहर रखने का आरोप, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने एनटीए भंग करने की मांग की
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने आरोप लगाया कि उसे नीट पर संसदीय समिति की बैठक में शामिल नहीं होने दिया गया। संगठन ने एनटीए को भंग कर नई परीक्षा व्यवस्था बनाने की मांग की।
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) ने आरोप लगाया कि उसके प्रतिनिधियों को नीट यूजी परीक्षा से संबंधित संसदीय स्थायी समिति की बैठक में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि आधिकारिक नोटिस में उनका नाम गवाहों की सूची में शामिल था। संगठन ने इस घटनाक्रम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे छात्रों और चिकित्सा समुदाय की आवाज को दबाने वाला कदम बताया।
यूडीएफ के अनुसार, उनके प्रतिनिधि निर्धारित समय पर बैठक में भाग लेने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया। संगठन का कहना है कि वह लंबे समय से नीट परीक्षा और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग उठाता रहा है, इसलिए इस बैठक में उसकी भागीदारी महत्वपूर्ण थी।
इस मुद्दे को लेकर यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करने की मांग भी दोहराई। संगठन का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों, पेपर लीक और कथित अनियमितताओं ने एनटीए की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
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यूडीएफ ने संसदीय समिति को एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें एनटीए को समाप्त कर परीक्षा संचालन के लिए एक नई, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था स्थापित करने की मांग की गई। संगठन का कहना है कि मेडिकल छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बहाल करने के लिए व्यापक सुधार आवश्यक हैं।
संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि उन्हें समिति के समक्ष अपने विचार रखने का अवसर मिलता, तो वे परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत कर सकते थे। उन्होंने दावा किया कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा कराई जानी चाहिए।
नीट परीक्षा को लेकर देशभर में लगातार बहस जारी है और इस विषय पर संसदीय समिति विभिन्न पक्षों से सुझाव प्राप्त कर रही है। ऐसे में यूडीएफ ने निष्पक्ष और समावेशी संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया है।
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