फर्जी वीज़ा स्पॉन्सरशिप विज्ञापनों पर सख्ती: अवैध प्रवासन रोकने के लिए यूके लाएगा नया कानून
यूके सरकार फर्जी वीज़ा स्पॉन्सरशिप विज्ञापनों पर नया कानून ला रही है। दोषियों पर असीमित जुर्माना लगेगा। कदम का मकसद अवैध प्रवासन और वीज़ा धोखाधड़ी रोकना है।
अवैध प्रवासन पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से ब्रिटेन सरकार एक नया कड़ा कानून लागू करने जा रही है, जिसके तहत फर्जी वीज़ा स्पॉन्सरशिप बेचने या उसका विज्ञापन करने को आपराधिक अपराध घोषित किया जाएगा। यह कदम एक अंडरकवर मीडिया जांच के बाद उठाया गया है, जिसमें दावा किया गया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खुलेआम फर्जी नौकरियों की पेशकश कर प्रवासियों को धोखाधड़ी के जरिए ‘स्किल्ड वर्कर वीज़ा’ दिलाने का खेल चल रहा है।
ब्रिटिश अख़बार ‘द टाइम्स’ की जांच में ऐसे एजेंटों को गुप्त रूप से कैमरे में रिकॉर्ड किया गया, जो गैर-मौजूद नौकरियों के नाम पर “सर्टिफिकेट ऑफ स्पॉन्सरशिप” बेच रहे थे। ये सर्टिफिकेट वीज़ा आवेदन के लिए जरूरी होते हैं और इनके जरिए कागजों पर वेतन दिखाकर गृह मंत्रालय की सख्त वार्षिक सैलरी शर्तों को पूरा किया जाता है। इस प्रक्रिया में हजारों पाउंड के बैंक लेन-देन दिखाए जाते हैं, जबकि वास्तविक वेतन केवल दस्तावेज़ों तक सीमित रहता है।
गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अगले सप्ताह से ऑनलाइन विज्ञापनों के माध्यम से फर्जी वीज़ा स्पॉन्सरशिप बेचने का प्रचार एक अलग आपराधिक अपराध बन जाएगा। दोषी पाए जाने वालों पर असीमित जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही, ऐसे मामलों की जांच अवैध कामकाज से जुड़े अन्य मामलों के साथ की जाएगी, क्योंकि सरकार आव्रजन प्रणाली के दुरुपयोग को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।
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हालांकि मौजूदा कानूनों के तहत भी फर्जी नौकरियों के लिए स्पॉन्सरशिप बेचना अवैध है, लेकिन जांच में यह सामने आया कि बिचौलियों की एक “तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था” तैयार हो गई है, जो भारी फीस लेकर सैकड़ों फर्जी नौकरियां पेश कर रही है। जांच के दौरान चार महीनों में 26 एजेंटों से बातचीत की गई और आतिथ्य, लॉजिस्टिक्स, सोशल केयर, आईटी, फाइनेंस, मार्केटिंग और ग्राफिक डिजाइन जैसे क्षेत्रों में 250 से अधिक फर्जी नौकरियों के उदाहरण दर्ज किए गए।
स्किल्ड वर्कर वीज़ा योजना 2020 में शुरू की गई थी और बाद में सामाजिक देखभाल क्षेत्र में कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए इसका विस्तार किया गया। यह योजना भारत सहित कई देशों के प्रवासी कामगारों को प्रायोजित रोजगार की अनुमति देती है। हाल के वर्षों में न्यूनतम वेतन बढ़ाने, कई भूमिकाओं को अयोग्य ठहराने और नियम सख्त करने से एक काला बाज़ार पनप गया है।
वर्क राइट्स सेंटर की प्रमुख डॉ. डोरा-ओलिविया विकोल ने कहा कि वैध प्रायोजक न मिलने से लोग अवैध रास्तों की ओर धकेले जा रहे हैं। उन्होंने दोषी कंपनियों पर मुकदमा चलाने के बजाय केवल लाइसेंस रद्द करने को “चौंकाने वाला” बताया।
लेबर सरकार ने बताया कि जुलाई 2024 के चुनाव के बाद से 17,400 से अधिक प्रवर्तन कार्रवाइयों में 12,300 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं। साथ ही, ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अवैध आव्रजन से जुड़ी सामग्री हटाने की जिम्मेदारी तय की गई है, जिसके उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
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