यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में चार नए स्थलों को मिला स्थान, फ्रांस से दक्षिण सूडान तक विरासत को मिली वैश्विक पहचान
यूनेस्को ने फ्रांस, ग्रीस, जापान और दक्षिण सूडान के चार ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक स्थलों को विश्व धरोहर सूची में शामिल कर उनके वैश्विक महत्व को मान्यता दी।
यूनेस्को ने विश्व धरोहर सूची में चार नए अंतरराष्ट्रीय स्थलों को शामिल किया है। इनमें फ्रांस के द्वितीय विश्व युद्ध के डी-डे लैंडिंग समुद्र तट, ग्रीस का माउंट ओलंपस, जापान की प्राचीन राजधानियां असुका और फुजिवारा, तथा दक्षिण सूडान का बोमा-बाडिंगिलो प्रवासी परिदृश्य शामिल हैं। इन स्थलों को उनकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के महत्व को देखते हुए विश्व धरोहर का दर्जा प्रदान किया गया है।
इन नामों को दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में आयोजित यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति की बैठक के दौरान मंजूरी दी गई। बैठक में दुनिया भर से प्राप्त नामांकनों की समीक्षा के बाद इन चार स्थलों को सूची में शामिल करने का निर्णय लिया गया।
फ्रांस के डी-डे लैंडिंग समुद्र तट द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मित्र देशों के ऐतिहासिक नॉर्मंडी अभियान के प्रमुख साक्षी रहे हैं। यह स्थल विश्व इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक का प्रतीक माना जाता है।
ग्रीस का माउंट ओलंपस अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ प्राचीन यूनानी पौराणिक कथाओं में विशेष महत्व रखता है। इसे देवताओं का निवास स्थान माना जाता है और यह सांस्कृतिक तथा धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जापान की प्राचीन राजधानियां असुका और फुजिवारा देश के प्रारंभिक शाही इतिहास, प्रशासनिक व्यवस्था और सांस्कृतिक विकास की महत्वपूर्ण धरोहर मानी जाती हैं। इन स्थलों में प्राचीन स्थापत्य और ऐतिहासिक अवशेष संरक्षित हैं।
वहीं, दक्षिण सूडान का बोमा-बाडिंगिलो प्रवासी परिदृश्य विशाल वन्यजीव प्रवास के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यह क्षेत्र जैव विविधता और प्राकृतिक संरक्षण के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
यूनेस्को का मानना है कि इन स्थलों को विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने से इनके संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी, साथ ही वैश्विक स्तर पर इनके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।
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