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अमेरिका में जन्मजात नागरिकता पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, ट्रंप का आदेश खारिज

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने जन्मजात नागरिकता को बरकरार रखते हुए डोनाल्ड ट्रंप के आदेश को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि संविधान के तहत जन्म से नागरिकता जारी रहेगी।

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसले में जन्मजात नागरिकता (Birthright Citizenship) के अधिकार को बरकरार रखा और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें इस लंबे समय से चले आ रहे संवैधानिक प्रावधान को खत्म करने की कोशिश की गई थी।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जो बच्चे संयुक्त राज्य अमेरिका में उन माता-पिता के यहां जन्म लेते हैं जो अवैध या अस्थायी रूप से देश में मौजूद हैं, वे अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के अधीन माने जाते हैं और उन्हें संविधान के चौदहवें संशोधन के तहत जन्म से ही नागरिकता प्राप्त होती है।”

सुप्रीम कोर्ट के जजों ने अप्रैल में हुई सुनवाई के दौरान संकेत दिए थे कि वे इस संवैधानिक सिद्धांत को बनाए रखने के पक्ष में हैं। दिलचस्प बात यह रही कि इस मामले की सुनवाई के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप स्वयं अदालत में मौजूद रहे, जो किसी भी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए पहली बार था। इस मामले को ट्रंप बनाम बारबरा” के नाम से जाना जाता है।

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जन्मजात नागरिकता क्या है?
यह एक कानूनी सिद्धांत है जिसके तहत अमेरिका की धरती पर जन्म लेने वाला हर व्यक्ति, चाहे उसके माता-पिता किसी भी देश के हों या उनकी इमिग्रेशन स्थिति कैसी भी हो, स्वतः अमेरिकी नागरिक बन जाता है। यह प्रावधान अमेरिका के संविधान के चौदहवें संशोधन (1868) में शामिल है, जिसे गृहयुद्ध के बाद लागू किया गया था।

हालांकि यह अधिकार पूरी तरह निरपेक्ष नहीं है। यह उन बच्चों पर लागू नहीं होता जो विदेशी राजनयिकों (डिप्लोमैट्स) के घर जन्म लेते हैं, क्योंकि वे अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में नहीं माने जाते। कुछ ऐतिहासिक अपवाद युद्धकालीन परिस्थितियों में भी देखे गए हैं।

ट्रंप का आदेश क्या था?
20 जनवरी 2025 को व्हाइट हाउस लौटने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें कहा गया था कि अवैध या बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों के बच्चों को नागरिकता नहीं दी जाएगी। यह आदेश 30 दिनों में लागू होना था, लेकिन इसे कई अदालतों ने असंवैधानिक बताते हुए रोक दिया।

अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद जन्मजात नागरिकता की संवैधानिक सुरक्षा बरकरार रह गई है।

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