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अमेरिका ने ईरान पर तेल प्रतिबंधों में दी ढील, 60 दिन का अस्थायी लाइसेंस जारी

अमेरिका ने ईरान पर तेल प्रतिबंधों में 60 दिन की ढील दी। नए लाइसेंस से तेल व्यापार, परिवहन और निर्यात की अनुमति मिली। वार्ता को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।

मध्य पूर्व के ऊर्जा और सुरक्षा परिदृश्य में एक बड़े बदलाव के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका के वित्त विभाग ने ईरान से जुड़े तेल निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है। सोमवार को जारी किए गए नए आदेश के तहत ईरान के कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल्स से संबंधित सभी लेन-देन के लिए 60 दिनों का सामान्य लाइसेंस (जनरल लाइसेंस) प्रदान किया गया है।

इस निर्णय के बाद अब ईरानी तेल के उत्पादन, परिवहन, वितरण और व्यापार से जुड़ी गतिविधियाँ अस्थायी रूप से अनुमति प्राप्त होंगी। यह छूट 21 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि 12:01 बजे (अमेरिकी पूर्वी डेलाइट समय) तक प्रभावी रहेगी। इससे पहले इन सभी गतिविधियों पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू थे।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह निर्णय स्विट्जरलैंड में चल रही द्विपक्षीय वार्ताओं में हुई प्रगति को देखते हुए लिया गया है। उन्होंने बताया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से मुक्त और सुरक्षित पारगमन की प्रतिबद्धता जताई है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निरीक्षकों को देश में प्रवेश की अनुमति देने पर सहमति दी है।

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इस ढांचे के तहत अमेरिका ने ईरानी तेल के निर्यात, परिवहन, बीमा, समुद्री शिपिंग और वित्तीय लेन-देन जैसी सेवाओं को भी छूट दी है। इसके अलावा कुछ शर्तों के तहत ईरानी कच्चे तेल का आयात भी अमेरिका में संभव होगा, यदि वह इस समझौते के दायरे में आता है।

हालांकि अमेरिकी वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह छूट उत्तर कोरिया और क्यूबा पर लागू नहीं होगी, और उन देशों पर पहले की तरह सख्त प्रतिबंध जारी रहेंगे।

स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक में हुई उच्च स्तरीय वार्ताओं में अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते की दिशा में रोडमैप तय करने पर सहमति बनी है। मध्यस्थ देशों कतर और पाकिस्तान ने बातचीत को “सकारात्मक और रचनात्मक” बताया है।

इस वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया, जबकि ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़र गालिबाफ ने नेतृत्व संभाला। दोनों देशों के बीच यह बातचीत क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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