अमेरिका ने रूसी और ईरानी कच्चे तेल पर छूट बढ़ाने से इनकार किया, भारत पर असर
अमेरिका ने रूसी और ईरानी तेल पर छूट बढ़ाने से इनकार किया। इससे भारत सहित कई देशों पर असर पड़ेगा और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है।
अमेरिका ने रूसी और ईरानी कच्चे तेल की खरीद पर दी गई प्रतिबंध छूट (विवर) को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है, जिसका असर भारत समेत कई देशों पर पड़ेगा। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने घोषणा करते हुए कहा कि अब रूसी और ईरानी तेल पर दी गई सामान्य अनुमति को नवीनीकृत नहीं किया जाएगा।
स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि 11 मार्च से पहले जो तेल समुद्र में भेजा जा चुका था, उसी तक यह छूट सीमित थी और अब उसका उपयोग पूरा हो चुका है। इस फैसले से ट्रंप प्रशासन की उस नीति का अंत हो गया है, जिसके तहत वैश्विक ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी छूट दी जा रही थी।
दरअसल, 12 मार्च को अमेरिकी ट्रेजरी ने 30 दिन की अस्थायी छूट दी थी, जिससे भारतीय रिफाइनरियां पहले से लदे रूसी तेल को खरीद सकें। इस कदम का उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों को स्थिर करना था, क्योंकि फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई थीं।
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बाद में अमेरिका ने ईरानी तेल खरीद के लिए भी 30 दिन की छूट दी थी। रूसी तेल की छूट 11 अप्रैल को समाप्त हो चुकी है, जबकि ईरानी तेल की छूट 19 अप्रैल तक प्रभावी है।
भारत इस नीति का बड़ा लाभार्थी रहा और रिपोर्ट के अनुसार उसने लगभग 3 करोड़ बैरल रूसी तेल का ऑर्डर दिया। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद रिलायंस जैसी भारतीय कंपनियों ने रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसी रूसी कंपनियों से खरीद कम कर दी थी।
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