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अमेरिका की जबरन श्रम जांच में चीन पर बढ़ेगी निगरानी, भारत के निर्यात भी आ सकते हैं जांच के दायरे में

अमेरिका ने जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों की जांच शुरू की है। इसमें चीन पर विशेष नजर रहेगी, जबकि भारत के सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और परिधान निर्यात भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

अमेरिका द्वारा जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों की जांच शुरू किए जाने के बाद चीन पर विशेष निगरानी बढ़ सकती है। वहीं इस जांच के चलते भारत के कुछ प्रमुख निर्यात क्षेत्रों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है।

थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने रविवार 15 मार्च 2026 को कहा कि अमेरिका की नई जांच में चीन के साथ-साथ भारत सहित लगभग 60 अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया है। हालांकि, शिनजियांग क्षेत्र में जबरन श्रम के आरोपों के कारण जांच का मुख्य फोकस चीन पर रहने की संभावना है।

GTRI के अनुसार, इस जांच के कारण भारत के सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और परिधान के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर भी अतिरिक्त निगरानी रखी जा सकती है।

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12 मार्च 2026 को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने सेक्शन 301 के तहत यह जांच शुरू की। इस प्रक्रिया में यह देखा जाएगा कि क्या विभिन्न देशों की नीतियां या प्रथाएं जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को रोकने में विफल रही हैं और क्या इससे अमेरिकी व्यापार को नुकसान पहुंच रहा है।

इस जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या किसी देश में सीधे तौर पर जबरन श्रम का उपयोग किया जा रहा है, या फिर ऐसे कच्चे माल का आयात किया जा रहा है जो किसी अन्य देश में जबरन श्रम से तैयार हुआ हो और बाद में उससे बने उत्पाद अमेरिका को निर्यात किए जा रहे हों।

GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि विशेष रूप से उन उत्पादों की जांच की जा सकती है जिनमें चीन से आयातित कच्चे माल का इस्तेमाल होता है। यदि ऐसे कच्चे माल का उपयोग भारत में बने उत्पादों में किया जाता है और वे अमेरिका भेजे जाते हैं, तो उन पर भी जांच हो सकती है।

उन्होंने बताया कि शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में उइगर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों से जुड़े जबरन श्रम के आरोपों के कारण चीन लंबे समय से आलोचना का सामना कर रहा है। हालांकि बीजिंग इन आरोपों को खारिज करते हुए कहता है कि ये कार्यक्रम रोजगार और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, शिनजियांग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कपास और सोलर पैनलों में इस्तेमाल होने वाले पॉलीसिलिकॉन का बड़ा उत्पादक है।

भारत में बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के तहत जबरन श्रम पर प्रतिबंध है, लेकिन भारतीय उद्योगों में चीन से आयातित कई कच्चे माल का उपयोग होता है। इसलिए भारत के निर्यात भी इस जांच के दायरे में आ सकते हैं।

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