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अमेरिका-ईरान शांति समझौता तय, 19 जून को होगा हस्ताक्षर; होर्मुज जलडमरूमध्य से हटेगी नाकेबंदी: ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते की घोषणा की है। 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होंगे और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी हटाई जाएगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता अंतिम रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जाएगी। हालांकि इस संधि पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे।

मध्य पूर्व में शांति की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए शांति वार्ता में शामिल सभी पक्षों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि समझौते के लागू होने के साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए पूरी तरह खुल जाएगा।

ट्रंप ने कहा, "मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खोलने की पूरी अनुमति देता हूं और साथ ही अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तत्काल प्रभाव से हटाने का आदेश देता हूं। दुनिया भर के जहाज अब फिर से सामान्य रूप से संचालन शुरू कर सकते हैं।"

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घोषणा के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 4.39 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और तेल 81.15 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में पूरी तरह सामान्य स्थिति बहाल होने में अभी कई महीने लग सकते हैं।

ट्रंप ने अपने पूर्ववर्ती अमेरिकी राष्ट्रपतियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे ईरान के साथ शांति स्थापित करने में सफल नहीं हो सके, जबकि वर्तमान समझौता पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा लाएगा। उन्होंने दावा किया कि मध्य पूर्व के नेताओं को ऐसा राष्ट्रपति मिला है जो वास्तविक शांति स्थापित करने में मदद कर सकता है।

उधर, ईरान ने भी समझौते की पुष्टि की है। तेहरान ने कहा कि दोनों पक्ष अंतिम समझौते से पहले 60 दिनों की वार्ता प्रक्रिया में शामिल होंगे। ईरान के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद समझौता ज्ञापन सार्वजनिक किया जाएगा।

ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अगले दौर की बातचीत शुरू होने से पहले अमेरिका द्वारा अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा किए जाने का सत्यापन करेगा। ईरान के कानूनी एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों के उपविदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि यह समझौता केवल कूटनीति का परिणाम नहीं बल्कि ईरान की सैन्य उपलब्धियों और बलिदानों का भी प्रतिफल है।

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