अमेरिका में 53 साल पुराना सुपरसोनिक फ्लाइट बैन हटाने की तैयारी, तेज हवाई यात्रा के नए युग की शुरुआत संभव
अमेरिका 53 साल पुराना सुपरसोनिक उड़ान प्रतिबंध हटाने की तैयारी कर रहा है। नए नियम शोर (नॉइज़) आधारित होंगे और नासा के एक्स-59 विमान ने इस बदलाव को संभव बनाया है।
संयुक्त राज्य अमेरिका अपनी हवाई यात्रा नीति में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। देश में पिछले 53 वर्षों से लागू सुपरसोनिक उड़ानों पर लगे प्रतिबंध को हटाने पर विचार किया जा रहा है। अमेरिकी परिवहन विभाग ने प्रस्ताव दिया है कि पुराने पूर्ण प्रतिबंध की जगह अब शोर (नॉइज़) आधारित नियम लागू किए जाएं, जिससे कुछ शर्तों के साथ सुपरसोनिक विमान जमीन के ऊपर उड़ान भर सकें।
सुपरसोनिक उड़ानें वे होती हैं जो ध्वनि की गति (मैक 1, लगभग 1235 किमी/घंटा) से तेज चलती हैं। अमेरिका में यह प्रतिबंध 1973 में इसलिए लगाया गया था क्योंकि उस समय विमान तेज “सोनिक बूम” उत्पन्न करते थे, जिससे लोगों को परेशानी होती थी और घरों में कंपन तक महसूस होता था।
नए प्रस्ताव के अनुसार, यदि विमान तय किए गए शोर मानकों के भीतर रहते हैं तो उन्हें जमीन के ऊपर उड़ान की अनुमति मिल सकती है। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) का कहना है कि टेकऑफ और लैंडिंग के लिए भी अलग शोर मानक बनाए जाएंगे, जिन्हें 2027 तक अंतिम रूप दिया जा सकता है।
और पढ़ें: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास लखनऊ के अस्पताल में भर्ती
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण नासा का एक्स-59 विमान है, जिसे कम शोर वाले सुपरसोनिक उड़ान के लिए डिजाइन किया गया है। परीक्षण के दौरान इसने 713 मील प्रति घंटे की गति हासिल की और दावा किया गया कि यह पारंपरिक सोनिक बूम के बजाय केवल हल्की “थंप” जैसी आवाज पैदा करता है।
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि नई तकनीक, बेहतर सामग्री और उन्नत डिजाइन से सुपरसोनिक उड़ान को सुरक्षित और कम शोर वाला बनाया जा सकता है। वहीं निजी कंपनियां जैसे बूम सुपरसोनिक और स्पाइक एयरोस्पेस भी तेज और कम शोर वाले विमानों पर काम कर रही हैं।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो भविष्य में अंतरमहाद्वीपीय यात्रा का समय काफी घट सकता है और हवाई यात्रा एक नए युग में प्रवेश कर सकती है।
और पढ़ें: महाकुंभ के दौरान राम मंदिर में सबसे अधिक हुई दान चोरी, जांच में कई बड़े खुलासे