कर्ज वसूली के लिए अमेरिका का तेल कंपनियों पर दबाव, वेनेजुएला में भारी निवेश को कहा
अमेरिका ने तेल कंपनियों से कहा है कि वे वेनेजुएला में भारी निवेश करें, तभी पुरानी जब्त संपत्तियों का कर्ज वापस मिल सकेगा। जोखिम और अनिश्चितता अब भी बड़ी चुनौती है।
अमेरिका ने अपनी प्रमुख तेल कंपनियों पर वेनेजुएला में दोबारा बड़े पैमाने पर निवेश करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। व्हाइट हाउस और अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों ने हाल के हफ्तों में तेल उद्योग के शीर्ष अधिकारियों से कहा है कि यदि वे वेनेजुएला में दो दशक पहले जब्त की गई संपत्तियों का मुआवजा या बकाया कर्ज वापस चाहते हैं, तो उन्हें जल्द से जल्द वहां लौटकर भारी पूंजी निवेश करना होगा।
2000 के दशक में वेनेजुएला सरकार ने कई अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियों की संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण कर लिया था। उस समय के राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज ने सरकारी तेल कंपनी पीडीवीएसए को ज्यादा नियंत्रण देने की मांग की थी, जिसे मानने से इनकार करने वाली कई विदेशी कंपनियों की संपत्तियां जब्त कर ली गईं। अमेरिकी कंपनी शेवरॉन ने सरकार के साथ समझौता कर संयुक्त उपक्रम के रूप में काम जारी रखा, जबकि एक्सॉन मोबिल और कोनोकोफिलिप्स जैसी कंपनियां देश छोड़कर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में चली गईं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार (3 जनवरी 2026) को कहा कि अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला के तेल क्षेत्र को फिर से सक्रिय करने के लिए अरबों डॉलर निवेश करने को तैयार हैं। यह बयान उस समय आया, जब कुछ ही घंटे पहले अमेरिकी बलों ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाया था।
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सूत्रों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने साफ किया है कि अगर मादुरो सत्ता में नहीं रहते, तो भी तेल कंपनियों को वेनेजुएला के तेल उद्योग के पुनर्निर्माण के लिए शुरुआती निवेश खुद करना होगा। इसके बाद ही उन्हें राष्ट्रीयकरण से जुड़े बकाया कर्ज की वसूली का मौका मिल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोनोकोफिलिप्स जैसी कंपनियों के लिए यह बेहद महंगा सौदा हो सकता है, क्योंकि कंपनी अब तक करीब 12 अरब डॉलर की वसूली की कोशिश कर रही है। एक्सॉन मोबिल भी 1.65 अरब डॉलर की भरपाई के लिए कानूनी लड़ाई लड़ चुकी है। हालांकि, सुरक्षा, राजनीतिक अस्थिरता, कमजोर बुनियादी ढांचे और अमेरिकी कार्रवाई की वैधता जैसे सवाल निवेश के बड़े जोखिम बने हुए हैं।
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