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कुवैत में अमेरिकी बेस पर हमले पर विवाद: सैनिकों ने पेंटागन के दावों को गलत बताया

कुवैत में अमेरिकी बेस पर ड्रोन हमले के बाद सैनिकों ने पेंटागन के दावों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि बेस कमजोर था और सुरक्षा तैयारियां पर्याप्त नहीं थीं।

कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरानी ड्रोन हमले को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। इस हमले में छह अमेरिकी आर्मी रिज़र्व सैनिकों की मौत हो गई थी और 20 से अधिक घायल हुए थे। अब घायल और जीवित बचे सैनिकों ने पेंटागन के आधिकारिक बयान को चुनौती दी है।

पेंटागन ने दावा किया था कि यह हमला ईरानी “स्क्वर्टर ड्रोन” से किया गया था, जिसे एक “मजबूत सुरक्षा वाले” बेस के बावजूद एयर डिफेंस सिस्टम रोक नहीं सका। लेकिन सैनिकों ने कहा कि जिस बेस पर वे तैनात थे, वह न तो पर्याप्त रूप से मजबूत था और न ही वे किसी बड़े हमले के लिए तैयार थे।

अमेरिकी सैनिकों ने बताया कि उनकी यूनिट, 103वीं सस्टेनमेंट कमांड, को सुरक्षा की दृष्टि से तैयार नहीं किया गया था। एक घायल सैनिक ने कहा कि बेस को “फोर्टिफाइड” कहना गलत है और उन्हें वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था नहीं दी गई थी।

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सैनिकों के अनुसार, उन्हें हमले से कुछ समय पहले मिसाइल अलर्ट के कारण शरण लेने को कहा गया था, लेकिन थोड़ी देर बाद “ऑल-क्लियर” सिग्नल दे दिया गया। इसके लगभग 30 मिनट बाद ड्रोन हमला हुआ, जिसमें भारी तबाही हुई। एक सैनिक ने बताया कि धमाके के बाद “सब कुछ हिल गया” और धुआं-धूल भर गया।

सैनिकों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें ऐसे स्थान पर तैनात किया गया था जो ईरानी ड्रोन और मिसाइलों की पहुंच में था और जिसे पहले से ही “ज्ञात खतरा क्षेत्र” माना जाता था। उनके अनुसार, बेस पर कोई मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद नहीं था।

सैनिकों ने यह भी कहा कि पेंटागन के दावे के विपरीत, घायलों को तत्काल सहायता नहीं मिली और कई सैनिकों ने खुद ही प्राथमिक उपचार किया।

इस पूरे मामले पर अभी तक अमेरिकी रक्षा विभाग या पेंटागन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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