अमेरिका ने ईरान के तेल कारोबार पर कसा शिकंजा, 50 से अधिक व्यक्तियों और संस्थाओं पर लगाए नए प्रतिबंध
अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगाते हुए 50 से अधिक व्यक्तियों, कंपनियों और जहाजों को निशाना बनाया। इसका उद्देश्य ईरान की आर्थिक क्षमता कमजोर करना बताया गया।
अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए उसके तेल क्षेत्र से जुड़े 50 से अधिक व्यक्तियों, कंपनियों और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। वॉशिंगटन का आरोप है कि ये सभी ईरानी कारोबारी मोहम्मद हुसैन शमखानी द्वारा संचालित ऐसे नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो अवैध रूप से ईरानी तेल के निर्यात और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने में मदद करता है।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने बताया कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य तेहरान के उस "अवैध शिपिंग और प्रतिबंधों से बचने वाले नेटवर्क" को ध्वस्त करना है, जिसने अमेरिकी आरोपों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान के हमलों को समर्थन दिया और प्रतिबंधों को दरकिनार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ये प्रतिबंध ईरानी शासन की आर्थिक जीवनरेखा को काटने के लिए लगाए गए हैं। उनके अनुसार, ईरानी सरकार छल और गुप्त वित्तीय नेटवर्क के सहारे काम करती है तथा शमखानी का नेटवर्क उसकी सबसे अधिक लाभ कमाने वाली व्यवस्थाओं में से एक है। उन्होंने कहा कि इन कदमों का उद्देश्य उन वित्तीय तंत्रों को खत्म करना है, जो अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए खतरा पैदा करते हैं।
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अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह कार्रवाई जुलाई 2025 और अप्रैल 2026 में लगाए गए प्रतिबंधों का विस्तार है। इसके साथ ही अब तक 200 से अधिक व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों को प्रतिबंध सूची में शामिल किया जा चुका है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिकी सेना लगातार चौथे दिन ईरान पर हमले कर चुकी है और उस पर नौसैनिक नाकाबंदी भी फिर से लागू की गई है। इसके जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाया, जिसकी जानकारी अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने दी।
नई प्रतिबंध सूची में भारत का उल्लेख केवल उन देशों में किया गया है, जहां शमखानी नेटवर्क के कुछ संचालक सक्रिय बताए गए हैं। हालांकि 14-15 जुलाई की नई सूची में किसी भी भारतीय व्यक्ति या कंपनी का नाम शामिल नहीं किया गया। इससे पहले अप्रैल में दिल्ली के चेतन प्रकाश बलहोत्रा और तेलंगाना के तंजौर सुनीलकुमार श्रीनिवास, जबकि मई में चेन्नई के स्वरूप जयंतीलाल बागरेचा का नाम संबंधित तेल नेटवर्क से जुड़े मामलों में सामने आया था।
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