ट्रम्प के बैन के कुछ घंटे बाद ईरान पर हमले में अमेरिकी सेना ने एंथ्रोपिक के क्लाउड AI का इस्तेमाल किया: रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने ईरान पर हमला करते समय एंथ्रोपिक कंपनी के क्लाउड AI टूल का उपयोग किया, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे सरकारी एजेंसियों के लिए प्रतिबंधित कर दिया था।
अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने हाल ही में ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के दौरान सैन फ्रांसिस्को स्थित एंथ्रोपिक कंपनी के क्लाउड AI आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल का इस्तेमाल किया है — हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके उपयोग पर पहले ही रोक लगा दी थी।
इससे पहले ट्रंप ने सभी संघीय एजेंसियों को आदेश दिया था कि वे एंथ्रोपिक की तकनीक का इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें, लेकिन यू.एस. सेंट्रल कमांड जैसे सैन्य कमांडों ने मध्य पूर्व में ईरान के खिलाफ हवाई हमलों में क्लाउड AI का उपयोग किया था। इन टूलों का इस्तेमाल मुख्य रूप से खुफिया आंकलन, लक्ष्यों की पहचान और युद्ध की स्थिति का सिमुलेशन करने के लिए किया गया।
इसके अलावा, यह AI तकनीक पहले वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलेस मादुरो को पकड़ने वाले सैन्य अभियान में भी इस्तेमाल की गई थी।
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ट्रंप के फैसले के पीछे एंथ्रोपिक के साथ चल रहे विवाद की वजह यह थी कि कंपनी क्लाउड को बिना सुरक्षा गार्डरोल के उपयोग की अनुमति नहीं देना चाहती थी — खासकर बड़े पैमाने पर घरेलू निगरानी या पूरी तरह से स्वायत्त हथियारों के मामले में। ट्रंप ने इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिम” बताया और इसे रोकने का आदेश दिया।
ट्रम्प ने कहा था, “हमें इसकी जरूरत नहीं है, हम इसे नहीं चाहते, और हम इसके साथ फिर कभी काम नहीं करेंगे” उन्होंने एंथ्रोपिक और इसके कर्मचारियों पर ‘लेफ्ट-विंग नट जॉब्स’ जैसे कड़े शब्द भी कहे।
एंथ्रोपिक ने बताया है कि वह इस ‘सप्लाई चेन जोखिम’ के निर्णय को अदालत में चुनौती देगी और कहा कि युद्ध विभाग संबंधी अनुबंधों को छोड़कर इसका उपयोग अन्य सरकारी कार्यों में प्रभावित नहीं होगा। कंपनी ने कहा कि यह निर्णय “कानूनी रूप से अस्वीकृत और खतरनाक मिसाल” बनेगा।
यह मामला इस बात पर सवाल उठाता है कि सैन्य उपयोग में AI तकनीक का क्या स्थान है और इससे जुड़े नैतिक व सुरक्षा चिंताओं पर राजनीतिक विवाद किस तरह उभर रहा है, खासकर जब तकनीक का इस्तेमाल युद्ध संचालन में हो रहा हो।
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