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भगोड़ा कहे जाने पर विजय माल्या का पलटवार, बोले- ब्रिटेन छोड़ने पर कानूनी रोक, भारत सरकार ने किया अन्याय

विजय माल्या ने भारत लौटने से इनकार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ब्रिटेन छोड़ने पर कानूनी रोक है। उन्होंने भारत सरकार पर अपने साथ अन्याय का आरोप लगाया।

विवादित कारोबारी विजय माल्या ने भारत लौटने से जानबूझकर इनकार करने के आरोपों को खारिज किया है। माल्या ने दावा किया कि वह 1992 से ब्रिटेन के स्थायी निवासी हैं और फिलहाल कानूनी रूप से ब्रिटेन छोड़ने की अनुमति नहीं है। उन्होंने भारत सरकार पर अपने मामले में ‘‘घोर अन्याय’’ करने का आरोप लगाया।

माल्या उन 15 लोगों में शामिल हैं, जिन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है। अक्टूबर 2025 में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा को बताया था कि इस सूची में माल्या और नीरव मोदी समेत कई चर्चित नाम शामिल हैं।

माल्या ने कहा कि जो लोग उन्हें भारत लौटने से भागने वाला व्यक्ति बताते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि वह लंबे समय से ब्रिटेन के स्थायी निवासी हैं और वर्तमान में देश छोड़ने पर कानूनी प्रतिबंध है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी कानूनी परेशानियां भारत सरकार की उन कार्रवाइयों से शुरू हुईं, जिन्हें उन्होंने अपने खिलाफ अनुचित बताया।

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माल्या ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा बंबई हाईकोर्ट में दायर कथित हलफनामे का भी उल्लेख किया। उनका दावा है कि दस्तावेज में 2021 तक उनसे 14,131.60 करोड़ रुपये की वसूली का उल्लेख था। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी राशि की वसूली के बावजूद उन्हें अब भी बैंक धोखाधड़ी करने वाला क्यों कहा जाता है।

इस साल फरवरी में बंबई हाईकोर्ट ने माल्या को फटकार लगाते हुए कहा था कि अदालत की कार्यवाही से जानबूझकर बचते हुए वह न्यायसंगत राहत की मांग नहीं कर सकते। अदालत ने उन्हें यह स्पष्ट करने का अंतिम अवसर दिया था कि क्या वह भारत लौटने का इरादा रखते हैं।

माल्या ने यह भी दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय ने उनसे जुड़ी जब्त संपत्तियों से 350 करोड़ रुपये से अधिक की राशि किंगफिशर कर्मचारियों को भुगतान के लिए जारी की थी।

वहीं, विदेश मंत्रालय ने पिछले साल दिसंबर में कहा था कि भारत आर्थिक अपराधियों को वापस लाने और उन्हें अदालतों में मुकदमे का सामना कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा था कि वापसी की प्रक्रिया में कई कानूनी स्तर शामिल हैं, लेकिन सरकार भगोड़ों को भारत लाने के प्रयास जारी रखेगी।

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