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डायबिटीज और कैंसर पर लगाम के लिए फलों के जूस, शुगर ड्रिंक्स और शराब पर बढ़ाया जाए टैक्स: WHO

WHO ने गैर-संचारी बीमारियों को रोकने के लिए फलों के जूस, शुगर ड्रिंक्स और शराब पर टैक्स बढ़ाने की सिफारिश की है, ताकि खपत घटे और स्वास्थ्य सुधरे।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग, कैंसर और चोटों जैसी गैर-संचारी बीमारियों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए फलों के जूस, शुगर युक्त पेय पदार्थों और शराब पर कर बढ़ाने की सिफारिश की है। WHO ने कहा है कि खासतौर पर बच्चों और युवाओं में इन बीमारियों के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए सख्त कर नीति बेहद जरूरी हो गई है।

WHO की दो नई वैश्विक रिपोर्टों में चेतावनी दी गई है कि अधिकांश देशों में कम टैक्स दरों के कारण शुगर ड्रिंक्स और शराब लगातार सस्ती होती जा रही हैं। इसका सीधा असर लोगों की खपत पर पड़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया कि 100 से अधिक देश सोडा जैसे शुगर ड्रिंक्स पर टैक्स लगाते हैं, लेकिन 100 प्रतिशत फलों के जूस, मीठे दूध वाले पेय और रेडी-टू-ड्रिंक कॉफी व चाय जैसे उच्च शर्करा वाले उत्पाद अक्सर कर के दायरे से बाहर रह जाते हैं। इन उत्पादों पर लगने वाला औसत कर किसी सामान्य शुगर सोडा की कीमत का केवल करीब दो प्रतिशत ही होता है।

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इसके अलावा, बहुत कम देश ऐसे हैं जो महंगाई के अनुसार टैक्स दरों में संशोधन करते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि समय के साथ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पाद और भी सस्ते हो जाते हैं। कम कीमतों के कारण ये उत्पाद अरबों डॉलर का मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि दुनिया भर की स्वास्थ्य प्रणालियों पर रोकी जा सकने वाली बीमारियों का आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

WHO ने सरकारों से शुगर ड्रिंक्स और शराब पर टैक्स को मजबूती से लागू करने और उसे बढ़ाने की अपील की है। WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने कहा कि स्वास्थ्य कर बीमारियों की रोकथाम और बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। उन्होंने कहा कि तंबाकू, शुगर ड्रिंक्स और शराब पर टैक्स बढ़ाकर सरकारें न केवल हानिकारक खपत को कम कर सकती हैं, बल्कि जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संसाधन भी जुटा सकती हैं।

एक अलग रिपोर्ट में WHO ने बताया कि 2022 के बाद से अधिकांश देशों में शराब की कीमतें या तो घटी हैं या स्थिर बनी हुई हैं, जबकि इसके गंभीर स्वास्थ्य जोखिम स्पष्ट हैं। वर्तमान में 167 देश शराब पर टैक्स लगाते हैं, जबकि 12 देशों में शराब पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद बीयर और शराब पर कर का वैश्विक औसत हिस्सा अपेक्षाकृत कम बना हुआ है।

WHO ने सभी देशों से 2035 तक तंबाकू, शराब और शुगर ड्रिंक्स की वास्तविक कीमतें बढ़ाने और कर संरचना में सुधार करने का आह्वान किया है, ताकि समय के साथ ये उत्पाद कम सुलभ बनें और लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा हो सके।

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