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होर्मुज जलसंधि में रुकावटों से आर्थिक नुकसान और ऊर्जा अस्थिरता, भारतीय नौसेना प्रमुख का बयान

भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके त्रिपाठी ने कहा कि होर्मुज जलसंधि में रुकावटों से क्षेत्रीय आर्थिक नुकसान और ऊर्जा अस्थिरता पैदा हुई है, जबकि समुद्री संसाधनों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा भविष्य को आकार देगी।

भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके त्रिपाठी ने मुंबई में आईओएस सागर की फ़्लैगिंग-ऑफ समारोह में कहा कि होर्मुज जलसंधि में रुकावटों ने क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों और ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है और क्रूड तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है।

एडमिरल त्रिपाठी ने आगे कहा कि अब समुद्री प्रतिस्पर्धा केवल तेल और ऊर्जा तक सीमित नहीं रही, बल्कि दुर्लभ पृथ्वी तत्व, महत्वपूर्ण खनिज, नए शिपिंग मार्ग और मानव डेटा जैसे संसाधनों तक फैल गई है। इसके चलते गहरे समुद्री क्षेत्रों में गतिविधियां और अवैध मछली पकड़ने की घटनाओं में भी वृद्धि हुई है।

उन्होंने बताया कि संयुक्त अमेरिका और इज़राइल के 28 फरवरी के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलसंधि को बंद कर दिया था। यह मार्ग विश्व के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, ईरान ने भारत को आश्वस्त किया है कि उसके जहाज़ सुरक्षित हैं और भारत को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ईरानी अधिकारियों के संपर्क में हैं और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ बातचीत कर क्षेत्र में शांति और कूटनीतिक समाधान के लिए प्रयासरत हैं।

एडमिरल त्रिपाठी का निष्कर्ष था कि समुद्री प्रतिस्पर्धा अब भविष्य के विकास और संसाधनों की दिशा तय करेगी, और भारत के लिए समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा स्थिरता प्राथमिकता बनी रहेगी।

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