×
 

40 सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों के ओवरहाल की योजना पर आज अहम बैठक, राजनाथ सिंह करेंगे डीएसी की बैठक की अध्यक्षता

रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में 40 सुखोई-30 एमकेआई विमानों के ओवरहाल प्रस्ताव पर चर्चा होगी। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने योजना रखी है, मंजूरी जरूरी है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में सबसे अहम प्रस्ताव भारतीय वायुसेना के 40 सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों के ओवरहाल का है। यह विमान भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े की रीढ़ माने जाते हैं।

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने यह प्रस्ताव रखा है। बड़ी धनराशि से जुड़े इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए डीएसी की मंजूरी जरूरी है। इससे पहले एचएएल ने पिछले साल 20 सुखोई-30 एमकेआई विमानों के ओवरहाल की योजना रखी थी, लेकिन अब प्रस्तावित संख्या बढ़ाकर 40 कर दी गई है।

भारतीय वायुसेना के लिए अहम विमान

भारतीय वायुसेना के पास करीब 260 सुखोई-30 एमकेआई विमान हैं। ये लड़ाकू विमान हवाई श्रेष्ठता अभियानों से लेकर लंबी दूरी के हमलों तक कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में पुराने हो रहे विमानों को उड़ान के लिए सक्षम और युद्ध के लिहाज से तैयार रखना सरकार की प्राथमिकता है।

और पढ़ें: बेंगलुरु रेलवे स्टेशन पर खाली बोगी में आग, मुंबई और ग्वालियर में भी बसें धधकीं

इस साल की शुरुआत में डीएसी ने सुखोई विमानों के एयरो-इंजन एग्रीगेट्स के ओवरहाल को मंजूरी दी थी। यह करीब 2.38 लाख करोड़ रुपये के व्यापक रक्षा अधिग्रहण पैकेज का हिस्सा था। इसका उद्देश्य विमानों की सेवा अवधि बढ़ाना और परिचालन जरूरतों को पूरा करने में वायुसेना की क्षमता बनाए रखना था।

एचएएल निभाएगा अहम भूमिका

सुखोई-30 एमकेआई कार्यक्रम में एचएएल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। कंपनी इन विमानों का निर्माण और रखरखाव करती है। दिसंबर 2024 में रक्षा मंत्रालय ने करीब 13,500 करोड़ रुपये में 12 नए सुखोई-30 एमकेआई खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इनका निर्माण एचएएल की नासिक इकाई में किया जाना है।

डीएसी की बैठक में सेना और नौसेना के अन्य प्रस्तावों पर भी चर्चा होने की संभावना है। जुलाई में परिषद ने करीब 52,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी थी, जिनमें वायु रक्षा, ड्रोन-रोधी प्रणालियां, सटीक मारक हथियार और निगरानी उपकरण शामिल थे।

ओवरहाल और आधुनिकीकरण अलग योजनाएं

40 सुखोई विमानों का प्रस्ताव व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम से अलग है। ओवरहाल का मुख्य उद्देश्य मौजूदा विमानों को तकनीकी रूप से दुरुस्त रखकर उनकी उड़ान क्षमता बनाए रखना है। जबकि अलग आधुनिकीकरण योजना के तहत विमानों में स्वदेशी प्रणालियां और नई तकनीक शामिल की जानी है।

डीएसी की मंजूरी मिलने पर एचएएल इसके क्रियान्वयन में प्रमुख भूमिका निभा सकता है। हालांकि, अंतिम लागत, समयसीमा और काम का दायरा रक्षा मंत्रालय की औपचारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

और पढ़ें: तमिलनाडु विधानसभा में कानून-व्यवस्था पर हंगामा, सीएम विजय बोले- पुलिस को सत्ता का केंद्र नहीं बनना चाहिए

 
 
 
Gallery Gallery Videos Videos Share on WhatsApp Share