75 साल की उम्र में भी जारी है पढ़ाई का जुनून, 32 डिग्रियों के बाद मिल्खी राम ने दी एक और परीक्षा
हिमाचल प्रदेश के 75 वर्षीय मिल्खी राम ने 32 शैक्षणिक डिग्रियां हासिल करने के बाद भी पढ़ाई जारी रखी। हाल ही में उन्होंने इग्नू से संस्कृत की परीक्षा दी।
उम्र केवल एक संख्या है और सीखने की इच्छा हो तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के गंदर क्षेत्र के रहने वाले 75 वर्षीय मिल्खी राम ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। 32 शैक्षणिक डिग्रियां हासिल करने के बाद भी उनका पढ़ाई के प्रति जुनून कम नहीं हुआ है।
हाल ही में मिल्खी राम ने एक और डिग्री हासिल करने के लिए परीक्षा दी। उन्होंने 30 जून को हमीरपुर स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के अध्ययन केंद्र में संस्कृत विषय से एमए की परीक्षा में हिस्सा लिया। परीक्षा केंद्र पर वह सबसे उम्रदराज परीक्षार्थी थे।
जिस उम्र में अधिकतर लोग आराम करना पसंद करते हैं, उस उम्र में मिल्खी राम का परीक्षा देने पहुंचना युवा छात्रों के लिए प्रेरणा बन गया। इग्नू में संस्कृत से एमए पाठ्यक्रम को ‘आचार्य’ की डिग्री के समकक्ष मान्यता प्राप्त है।
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मिल्खी राम का जन्म 10 फरवरी 1952 को हुआ था। उन्होंने वर्ष 1972 में वन विभाग में नौकरी शुरू की थी। इसके बाद वर्ष 1976 में धर्मशाला के एक निजी कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई का सिलसिला कभी नहीं रोका।
वर्ष 2010 में वन विभाग से प्रथम श्रेणी अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त होने तक वह 26 डिग्रियां हासिल कर चुके थे। अब उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों की संख्या बढ़कर 32 हो चुकी है। उनकी डिग्रियों में बीएड, प्रभाकर, एलएलबी, पत्रकारिता, संस्कृत में बीए, हिंदी, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, इतिहास, अंग्रेजी और अर्थशास्त्र में एमए, एमबीए, एमफिल और हिंदी में पीएचडी शामिल हैं।
मिल्खी राम ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि ज्ञान ऐसी संपत्ति है जिसे कोई छीन नहीं सकता। उन्होंने अपनी इस लंबी शैक्षणिक यात्रा का श्रेय पत्नी विद्या देवी, बेटे और पुत्रवधू को दिया।
उन्होंने बताया कि हाल ही में उन्होंने अपनी आंखों का इलाज भी कराया है, ताकि पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी में कोई परेशानी न आए। उनकी कहानी आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।