आप में बड़ा संकट: राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों के पलायन के बाद केजरीवाल-सिसोदिया की आपात बैठक
आप में 7 सांसदों के भाजपा में जाने के बाद संकट गहरा गया है। सिसोदिया और केजरीवाल ने रणनीति पर चर्चा की, जबकि पार्टी दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की तैयारी में है।
आम आदमी पार्टी (AAP) में हुए बड़े राजनीतिक संकट के बाद पार्टी नेतृत्व सक्रिय हो गया है। सात राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने नई दिल्ली स्थित आवास पर पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की।
सिसोदिया गुजरात दौरे से लौटने के तुरंत बाद सीधे केजरीवाल के आवास पहुंचे, जहां दोनों नेताओं के बीच करीब आधे घंटे तक रणनीतिक चर्चा हुई। इस बैठक में पार्टी की मौजूदा स्थिति, हुए नुकसान और आने वाले समय में संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर विचार किया गया।
सूत्रों के अनुसार, नेताओं ने इस बात पर भी चर्चा की कि इस बड़े राजनीतिक पलायन का पंजाब विधानसभा चुनावों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, जो अगले वर्ष होने वाले हैं।
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हाल ही में राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल समेत सात राज्यसभा सांसदों ने आप छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम को पार्टी ने “पंजाब के साथ विश्वासघात” बताया है और आरोप लगाया है कि भाजपा ने केंद्रीय एजेंसियों के दबाव से यह विभाजन कराया।
AAP अब इन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई पर विचार कर रही है। पार्टी ने संकेत दिया है कि वह राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को पत्र भेजकर चड्ढा, मित्तल और पाठक के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग करेगी।
सूत्रों के अनुसार, इन तीनों नेताओं को सार्वजनिक रूप से भाजपा में शामिल होते देखा गया है, जबकि अन्य चार नेताओं के मामले की पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है।
इस घटनाक्रम से राज्यसभा में AAP की ताकत 10 से घटकर केवल 3 रह गई है, जिससे एनडीए को ऊपरी सदन में बड़ा फायदा हुआ है। यह स्थिति पार्टी के लिए खासकर पंजाब, गोवा और गुजरात चुनावों से पहले बड़ा झटका मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस टूट के बाद AAP को अपनी विस्तार रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।
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