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सरकार मुद्दा सुलझाना चाहती है तो धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना होगा: अभिजीत दिपके

सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके ने कहा कि नीट पेपर लीक विवाद खत्म करने का एकमात्र रास्ता धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। उन्होंने जंतर-मंतर आंदोलन जारी रखने की बात कही।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शुक्रवार को कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या केंद्र सरकार इस विवाद को खत्म करना चाहती है तो इसका एकमात्र समाधान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। उन्होंने कहा कि नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब देशव्यापी अभियान बन चुका है और नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से हट नहीं जाते।

सरकार के साथ होने वाली बातचीत से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए दिपके ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा 26 दिन बाद अनशन समाप्त करने के फैसले का वह स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि वांगचुक ने छात्रों के हित में अपना अनशन खत्म किया और उनकी प्रमुख शर्त थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कोई मामला दर्ज नहीं होना चाहिए।

दिपके ने कहा, "सोनम सर ने अपनी जान जोखिम में डालकर देशभर के लोगों को जागरूक किया। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए जो योगदान दिया है, उसे इतिहास में याद रखा जाएगा।"

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उन्होंने कहा कि अब आंदोलन एक राष्ट्रीय अभियान का रूप ले चुका है और देश के युवाओं की मांग बिल्कुल स्पष्ट है। उनकी एक ही मांग है कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। दिपके ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन उनकी मांग पूरी होने तक जारी रहेगा।

केंद्र सरकार के मंत्रियों के साथ होने वाली बैठक पर उन्होंने कहा कि बातचीत एक तटस्थ स्थान पर होगी, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।

वहीं, सीजेपी प्रतिनिधि आशुतोष रंका ने भी कहा कि जंतर-मंतर पर आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते। उन्होंने बताया कि दोपहर 12:30 बजे संविधान क्लब ऑफ इंडिया में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ बैठक प्रस्तावित है, जिसमें डॉ. जितेंद्र सिंह के भी शामिल होने की संभावना है।

रंका ने कहा कि सोनम वांगचुक का अनशन सरकार के आश्वासनों के बाद समाप्त हुआ, लेकिन आंदोलन का मुख्य उद्देश्य अभी भी धर्मेंद्र प्रधान को हटाना है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो संदेश का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार पर जनता का दबाव बढ़ रहा है और सबसे कड़ी कार्रवाई शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होगा।

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