जल जीवन मिशन में अनियमितताओं पर कार्रवाई, 4,000 से अधिक लोगों के खिलाफ कदम: सरकार
जल जीवन मिशन में कार्य की गुणवत्ता, वित्तीय गड़बड़ियों और अपर्याप्त जलापूर्ति की शिकायतों पर देशभर में 4,000 से अधिक लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में अनियमितताओं को लेकर देशभर में 4,000 से अधिक लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। यह जानकारी गुरुवार (29 जनवरी, 2026) को लोकसभा में दी गई। सरकार ने स्पष्ट किया कि प्राप्त शिकायतों के आधार पर जांच कर आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि विभिन्न राज्यों से जल जीवन मिशन से जुड़ी कई शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए विशेष टीमें गठित की गईं। इन टीमों ने मौके पर जाकर जांच की और अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी। साथ ही, इन रिपोर्टों को संबंधित राज्य सरकारों के साथ भी साझा किया गया।
मंत्री ने बताया कि अधिकांश शिकायतें कार्य की खराब गुणवत्ता, वित्तीय अनियमितताओं और पर्याप्त जल आपूर्ति न होने से संबंधित थीं। कई स्थानों पर निर्धारित मानकों के अनुसार काम न होने, धन के दुरुपयोग और पाइपलाइन या जलापूर्ति योजनाओं के अधूरे रहने की शिकायतें मिलीं। इन सभी मामलों की जांच के बाद दोषी पाए गए व्यक्तियों और एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
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सी.आर. पाटिल ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत परियोजनाओं के लिए अनुदान केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों को जारी किया जाता है। इसके बाद राज्य सरकारें निविदाएं जारी करती हैं, परियोजना रिपोर्ट तैयार करती हैं और कार्य की प्रगति तथा अनुपालन की जानकारी जल शक्ति मंत्रालय को उपलब्ध कराती हैं। यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है, तो उसके लिए संबंधित राज्य सरकार और कार्य एजेंसियां जिम्मेदार होती हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है और इस लक्ष्य को हासिल करने में किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार लगातार निगरानी कर रही है और जहां भी गड़बड़ी पाई जा रही है, वहां सख्त कार्रवाई की जा रही है।
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