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अडानी डिफेंस और डीआरडीओ की साझेदारी, भारतीय वायुसेना के लिए विकसित होंगे अगली पीढ़ी के निगरानी विमान

अडानी डिफेंस और डीआरडीओ ने भारतीय वायुसेना के लिए अत्याधुनिक हवाई निगरानी प्रणाली विकसित करने को साझेदारी की है। छह एयरबस A321 विमानों को मिशन सिस्टम से लैस किया जाएगा।

भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के साथ साझेदारी की है। इस समझौते के तहत भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के लिए अगली पीढ़ी की हवाई निगरानी प्रणाली विकसित की जाएगी।

समझौते के अनुसार, अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और डीआरडीओ संयुक्त रूप से छह संशोधित एयरबस ए321 विमानों पर अत्याधुनिक एयरबोर्न मिशन सिस्टम विकसित, निर्मित और एकीकृत करेंगे। यह परियोजना भारतीय वायुसेना की निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और रणनीतिक क्षमताओं को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।

इन विमानों को आधुनिक सेंसर, संचार प्रणाली और मिशन उपकरणों से लैस किया जाएगा, जिससे भारतीय वायुसेना को लंबी दूरी तक निगरानी करने और वास्तविक समय में जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलेगी। यह कार्यक्रम देश की रक्षा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने कहा कि यह साझेदारी भारत में रक्षा उत्पादन और स्वदेशी तकनीक के विकास को गति देगी। कंपनी डीआरडीओ के साथ मिलकर अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों के निर्माण में योगदान देगी।

भारतीय वायुसेना लंबे समय से अपनी निगरानी क्षमता को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। आधुनिक युद्ध में हवाई निगरानी और खुफिया जानकारी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में नए एयरबोर्न मिशन सिस्टम से वायुसेना की परिचालन क्षमता में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है।

डीआरडीओ देश की रक्षा तकनीक के विकास में अग्रणी संस्था है और लगातार स्वदेशी हथियारों तथा सैन्य प्रणालियों को विकसित करने पर काम कर रहा है। वहीं, अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस भारत के निजी रक्षा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में शामिल है।

यह परियोजना केंद्र सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने के अभियान को भी मजबूती देगी। इससे भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता में वृद्धि होने की संभावना है।

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