तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत में अफगानिस्तान के पहले दूत बने नूर अहमद नूर
तालिबान के सत्ता में आने के बाद अफगानिस्तान ने नूर अहमद नूर को भारत में चार्जे डी’अफेयर्स नियुक्त किया है, जिससे भारत-अफगान संबंधों में नई गति दिख रही है।
तालिबान के वर्ष 2021 में काबुल पर कब्ज़ा करने के लगभग पाँच साल बाद अफगानिस्तान ने भारत में अपना पहला आधिकारिक प्रतिनिधि नियुक्त किया है। अफगानिस्तान ने नूर अहमद नूर को नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास में चार्जे डी’अफेयर्स के रूप में नियुक्त किया है। उनकी तैनाती की पुष्टि अक्टूबर 2025 में अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी की भारत यात्रा के बाद हुई थी, जब उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी।
नूर अहमद नूर इससे पहले अफगान विदेश मंत्रालय में फर्स्ट पॉलिटिकल डिपार्टमेंट के महानिदेशक के रूप में कार्य कर चुके हैं। वे मुत्तकी के प्रतिनिधिमंडल के साथ भी भारत आए थे और हाल ही में नई दिल्ली पहुंचकर अपने नए दायित्व संभाले हैं। नूर तालिबान के वरिष्ठ सदस्य माने जाते हैं। भारत यात्रा के दौरान उन्होंने दारुल उलूम देवबंद मदरसे का भी दौरा किया था।
दिसंबर 2025 में नूर अहमद नूर ने बांग्लादेश की यात्रा भी की थी, जहां उन्होंने चुनावों से पहले कई इस्लामी नेताओं से मुलाकात की थी। इससे पहले अप्रैल 2023 में तालिबान ने दिल्ली में चार्जे डी’अफेयर्स भेजने की कोशिश की थी, लेकिन दूतावास के कर्मचारियों के विरोध के कारण यह प्रयास विफल रहा। इसके बाद तालिबान ने मुंबई स्थित अपने वाणिज्य दूतावास में इकरामुद्दीन कामिल को नियुक्त किया था।
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भारत और अफगानिस्तान के संबंधों में हाल के महीनों में सुधार देखा गया है, खासकर अक्टूबर 2025 में मुत्तकी की सात दिवसीय भारत यात्रा के बाद। इस दौरान एक समझौते के तहत भारत ने इस्लामिक अमीरात द्वारा नियुक्त राजनयिकों को नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास में स्वीकार करने पर सहमति दी। अब अफगान नागरिक चिकित्सा उपचार और व्यापारिक उद्देश्यों के लिए भारतीय वीज़ा के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, भारत अब भी औपचारिक रूप से तालिबान शासन को मान्यता नहीं देता।
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