भारत की फ़िल्म इंडस्ट्री में AI का क्रांतिकारी बदलाव
भारत की फ़िल्म इंडस्ट्री एआई का उपयोग कर रही है, जिससे फ़िल्म निर्माण लागत घट रही है, डबिंग आसान हो रही है और पौराणिक फ़िल्मों में नई क्रिएटिविटी आ रही है।
भारत की फ़िल्म इंडस्ट्री, जिसे दुनिया का सबसे अधिक फ़िल्म बनाने वाला उद्योग माना जाता है, अब एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के प्रयोग से पूरी तरह बदल रही है। बॉलीवुड स्टूडियोज़ अब एआई का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर कर रहे हैं – जैसे कि पूरी तरह से एआई निर्मित फ़िल्में बनाना, एआई डबिंग के माध्यम से फ़िल्मों को कई भाषाओं में रिलीज़ करना और पुरानी फ़िल्मों के एंडिंग्स को बदलकर अतिरिक्त बिक्री हासिल करना।
कलेक्टिव आर्टिस्ट्स नेटवर्क, जो बॉलीवुड की प्रमुख प्रतिभा एजेंसी है, अब डिजिटल सितारों को तैयार करने में भी सक्रिय है। बैंगलोर स्थित उनके एआई स्टूडियो में फ़िल्मकार हिंदू धर्मग्रंथों और पौराणिक कथाओं पर आधारित कंटेंट तैयार कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, “रामायण” पर आधारित एक फ़िल्म में हनुमानजी को पर्वत उठाकर उड़ते हुए दिखाया गया है, जबकि “महाभारत” पर आधारित शो में गांधारी का अंधे राजा से विवाह करने के बाद आँखों पर पट्टी बांधना दिखाया गया है।
एआई का उपयोग न केवल फ़िल्म निर्माण लागत को पारंपरिक तरीकों से पाँच गुना कम कर रहा है, बल्कि निर्माण समय को भी एक चौथाई तक घटा रहा है। जियोस्टार और एबंडेंटिया एंटरटेनमेंट जैसी कंपनियाँ एआई आधारित कंटेंट में निवेश कर रही हैं और उम्मीद कर रही हैं कि आने वाले तीन वर्षों में उनकी कुल आय में एक-तिहाई हिस्सा एआई से उत्पन्न होगा।
हालांकि, एआई का प्रयोग विवादास्पद भी रहा है। 2013 की फ़िल्म “रांझना” का एआई-संशोधित संस्करण दर्शकों और अभिनेता धनुष की आलोचना का विषय बना। बावजूद इसके, एआई द्वारा डबिंग तकनीक और नई कथाएँ दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं।
फिल्मकार अनुराग कश्यप ने कहा कि भारत में एआई का इस्तेमाल कला के बजाय व्यावसायिक दृष्टिकोण से हो रहा है, लेकिन स्टूडियोज़ पौराणिक फ़िल्मों के माध्यम से इसे लाभकारी बना रहे हैं। एआई की इस नई लहर ने भारतीय फ़िल्म उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है।