एआई-171 विमान हादसे का रहस्य बरकरार: पायलट की गलती, तकनीकी खराबी या सिस्टम फेलियर?
एयर इंडिया एआई-171 हादसे के एक साल बाद भी दुर्घटना की असली वजह स्पष्ट नहीं है। जांच जारी है और पायलट त्रुटि, तकनीकी खराबी समेत कई पहलुओं की पड़ताल हो रही है।
भारत के इतिहास की सबसे भयावह विमान दुर्घटनाओं में से एक एयर इंडिया की उड़ान एआई-171 त्रासदी को आज एक वर्ष पूरा हो गया है, लेकिन हादसे की असली वजह अब भी रहस्य बनी हुई है। 12 जून 2025 को अहमदाबाद हवाई अड्डे से लंदन के गैटविक हवाई अड्डे के लिए उड़ान भरने वाला बोइंग 787 ड्रीमलाइनर टेकऑफ के महज 32 सेकंड बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में विमान में सवार 242 में से 241 लोगों और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हो गई थी।
एक साल बाद भी जांच एजेंसियां, विमानन विशेषज्ञ और पीड़ित परिवार इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं कि आखिर यह दुर्घटना क्यों हुई। क्या यह पायलट की गलती थी, कोई तकनीकी खराबी थी या फिर विमान की किसी प्रणाली में गंभीर विफलता हुई थी?
जुलाई 2025 में भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) द्वारा जारी प्रारंभिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि टेकऑफ के कुछ ही क्षण बाद कॉकपिट में मौजूद दोनों फ्यूल कंट्रोल स्विच "रन" से "कटऑफ" स्थिति में चले गए थे। इससे दोनों इंजनों में ईंधन की आपूर्ति रुक गई और विमान तेजी से ऊंचाई खोने लगा। बाद में पायलटों ने स्विच दोबारा "रन" स्थिति में लाकर इंजन चालू करने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में दर्ज बातचीत ने मामले को और उलझा दिया। रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछता सुनाई देता है, "तुमने फ्यूल क्यों बंद किया?" जिस पर जवाब मिलता है, "मैंने ऐसा नहीं किया।"
हादसे के समय विमान का संचालन 56 वर्षीय कप्तान सुमीत सभरवाल और 32 वर्षीय सह-पायलट क्लाइव कुंदर कर रहे थे। दोनों अनुभवी और पूरी तरह प्रमाणित पायलट थे। हालांकि, अंतिम जांच रिपोर्ट अभी तक जारी नहीं हुई है और जीई एयरोस्पेस इंजनों की विस्तृत जांच जारी है।
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