ईरान-अमेरिका समझ बढ़ना सकारात्मक संकेत, लेकिन साइबर खतरों और आतंकवाद के नए तौर-तरीकों से सतर्क रहना होगा: अजीत डोभाल
अजीत डोभाल ने ईरान-अमेरिका तनाव कम होने का स्वागत किया, लेकिन साइबर हमलों, नई तकनीकी चुनौतियों और आतंकवाद के बदलते स्वरूप से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग पर जोर दिया।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती समझ को सकारात्मक विकास बताते हुए कहा है कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिल सकती है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया को साइबर हमलों, नई तकनीकी चुनौतियों और आतंकवाद के बदलते स्वरूप जैसे उभरते खतरों के प्रति लगातार सतर्क रहने की आवश्यकता है।
डोभाल ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से वैश्विक व्यापार नेटवर्क में अनिश्चितता घट सकती है और स्थिर आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भर देशों की आर्थिक पुनर्बहाली को गति मिल सकती है। उनके अनुसार, ईरान-अमेरिका संबंधों में सुधार से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, होर्मुज़ जलडमरूमध्य के जरिए समुद्री व्यापार अधिक सुचारु रूप से संचालित हो सकेगा और उर्वरक तथा रसायन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपूर्ति संबंधी बाधाएं कम होंगी।
उन्होंने इस मुद्दे को केवल कूटनीतिक या सैन्य दृष्टिकोण से देखने के बजाय आर्थिक सुरक्षा से भी जोड़कर देखा। डोभाल ने कहा कि दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव ऊर्जा बाजारों, शिपिंग मार्गों और वस्तुओं की आपूर्ति को सीधे प्रभावित करता है।
ब्रिक्स देशों की सुरक्षा बैठक को संबोधित करते हुए डोभाल ने कहा कि दुनिया इस समय सैन्य संघर्षों, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, आर्थिक दबावों और तेज तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक सुरक्षा तंत्र उभरते खतरों का मुकाबला करने में पीछे छूटते दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने साइबर हमलों, विघटनकारी तकनीकों और आतंकवाद के अत्याधुनिक स्वरूपों को प्रमुख चुनौतियों के रूप में चिन्हित किया। डोभाल ने कहा कि इन खतरों से निपटने के लिए नए दृष्टिकोण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।
बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी और रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु सहित ब्रिक्स देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी शामिल हुए। चर्चा के दौरान हाइब्रिड खतरों, तकनीकी कमजोरियों और सीमा-पार सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधियों के बीच मतभेद भी सामने आए। ईरानी प्रतिनिधि गादिर निज़ामीपूर ने यूएई पर ईरान विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने ब्रिक्स के भीतर संकट प्रबंधन संस्था, साझा सुरक्षा सूचना नेटवर्क और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा।
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