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अखिलेश यादव का बीजेपी और चुनाव आयोग पर एसआईआर में धांधली का आरोप, बोले- लोकतंत्र और संविधान से हो रहा धोखा

अखिलेश यादव ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर एसआईआर में गड़बड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने मतदाता सूचियों में लाखों संदिग्ध प्रविष्टियां होने का दावा किया और पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और चुनाव आयोग पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में हेरफेर करने और देश के लोकतंत्र, संविधान तथा नागरिकों को धोखा देने का आरोप लगाया। लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि प्रशासन के सहयोग से बड़े पैमाने पर चुनावों को प्रभावित करने की तैयारी की जा रही है।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि जब बीजेपी को जनता के बीच अपना समर्थन कमजोर होता दिखाई देता है, तो वह चुनाव आयोग की आड़ लेती है। उनके मुताबिक, जिन विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी को हार का डर है, वहां मतदाता सूची में गड़बड़ियों की आशंका अधिक है।

उन्होंने मुरादाबाद नगर विधानसभा सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां केवल 782 वोटों से हारी थी। अखिलेश ने दावा किया कि इसके बाद इस क्षेत्र की मतदाता सूची में 8,000 से 10,000 तक फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़े गए।

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बीजेपी की ‘10 चुनावी रणनीतियों’ का आरोप

अखिलेश यादव ने बीजेपी पर चुनाव में कथित अनियमितताओं के लिए दस तरीके अपनाने का आरोप लगाया। इनमें फर्जी मतदाता जोड़ना, विरोधियों के वास्तविक वोट हटाना, मतदान से पहले पैसे और भोजन बांटना, मतदाताओं को डराना, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में हेरफेर और मतगणना में गड़बड़ी शामिल हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों को विजेता घोषित करना, जीत के प्रमाणपत्र जारी करना और चुनाव के बाद विपक्षी दलों में टूट करवाकर सरकारें बनाना भी इन तरीकों में शामिल है।

19.2 लाख संदिग्ध प्रविष्टियों का दावा

सपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी के पीडीए प्रहरी विभिन्न जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूचियों की जांच कर रहे हैं। उनके अनुसार, कार्यकर्ताओं ने अब तक करीब 19.2 लाख कथित फर्जी मतदाता प्रविष्टियों की पहचान की है।

अखिलेश ने फॉर्म-6 के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, नए मतदाता पंजीकरण के लिए 87.66 लाख आवेदन मिले और अंतिम मतदाता सूची में 84.30 लाख नाम जोड़े गए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने केवल 71.38 लाख आवेदनों का विवरण सार्वजनिक किया, जबकि 16.18 लाख आवेदनों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

उन्होंने दावा किया कि इन 16.18 लाख मामलों के अलावा कार्यकर्ताओं ने तीन लाख और संदिग्ध प्रविष्टियां खोजी हैं। कुछ मामलों में मतदाता और उनके माता-पिता के नाम समान होने का भी आरोप लगाया गया। इन दावों पर चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया का उल्लेख उपलब्ध खबर में नहीं है।

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