महिलाओं के आरक्षण कानून में संशोधन का बिल असफल: अखिलेश यादव ने बीजेपी की नीयत पर उठाए सवाल
महिलाओं के आरक्षण कानून में संशोधन के बिल के लोकसभा में असफल होने के बाद अखिलेश यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि यह महिलाओं को विभाजित करने और ध्यान भटकाने का प्रयास था।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिलाओं के आरक्षण कानून में संशोधन का प्रस्ताव लोकसभा में पारित न होने पर केंद्र सरकार पर हमला बोला। यादव ने कहा कि यह बिल महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए एक ठोस कदम के बजाय जल्दबाजी में पेश किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस विधायी प्रक्रिया में न तो ताजे जनसंख्या आंकड़ों का उपयोग किया गया और न ही इसके संरचनात्मक प्रभाव पर पर्याप्त विचार विमर्श किया गया।
यादव ने कहा कि 2011 के पुराने जनगणना आंकड़ों का इस्तेमाल करना गलत है, क्योंकि यह महिलाओं के आरक्षण का सही तरीके से वितरण प्रभावित कर सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि कोई भी बड़ा आरक्षण नीति लागू करने से पहले ताजे जनगणना आंकड़ों का आधार लिया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन (delimitation) अभ्यास से जोड़कर इसे विलंबित करने की कोशिश की है, जिससे जातिगत आधारित जनगणना की मांग को नजरअंदाज किया जा रहा है। यादव ने इस बिल को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए कहा कि यह बिल बेरोजगारी, महंगाई और महिलाओं की सुरक्षा जैसे वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास था।
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यादव ने कहा कि बीजेपी की मंशा केवल समाज को विभाजित करने की थी और उन्होंने यह भी दावा किया कि विपक्ष की एकता ने बीजेपी की योजना को नाकाम कर दिया। उन्होंने कहा कि इस बिल की हार बीजेपी की नीयत की हार है।
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