मंदिर का मान क्यों गिराया? राम मंदिर चंदा मामले को लेकर अखिलेश यादव का बीजेपी पर काव्यात्मक हमला
अखिलेश यादव ने राम मंदिर चंदा मामले को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि पार्टी 2027 चुनाव जीतने के लिए धन का इस्तेमाल कर रही है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को अयोध्या के राम मंदिर में चंदे की कथित हेराफेरी के मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अपने अंदाज में काव्यात्मक टिप्पणी करते हुए लोगों से आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी को वोट नहीं देने की अपील की।
कन्नौज से लोकसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच पर करीब तीन मिनट आठ सेकंड का एक एआई-निर्मित वीडियो भी साझा किया। वीडियो में लोगों को कथित तौर पर चोरी के पैसे को स्वीकार करने से इनकार करते हुए दिखाया गया है। वीडियो की पृष्ठभूमि में राम मंदिर नजर आता है। इसी के जरिए अखिलेश ने बीजेपी पर राजनीतिक निशाना साधा।
अखिलेश यादव पिछले काफी समय से राम मंदिर चंदे से जुड़े कथित गबन के मुद्दे को उठाते रहे हैं और इस मामले में बीजेपी सरकार को घेरते रहे हैं। वह 10 साल बाद उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं।
इस सप्ताह की शुरुआत में भी अखिलेश ने दावा किया था कि 2027 का विधानसभा चुनाव जीतने के लिए बीजेपी के पास अब ‘पैसे के अलावा कुछ नहीं बचा है’। उत्तर प्रदेश में महिलाओं को 20 हजार रुपये की सहायता राशि दिए जाने की संभावित घोषणा से जुड़ी खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने बीजेपी पर कथित ‘गलत तरीके से अर्जित धन’ का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था।
अखिलेश ने कहा था कि उत्तर प्रदेश की जागरूक महिलाएं ऐसा पैसा स्वीकार नहीं करेंगी। उन्होंने दूसरे राज्यों में महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता की घोषणाओं का भी जिक्र किया।
हालांकि, बीजेपी ने अखिलेश के आरोपों को खारिज करते हुए समाजवादी पार्टी के शासनकाल को लेकर पलटवार किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में कानून-व्यवस्था खराब थी और लगातार दंगे तथा कर्फ्यू लगे। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर भी नहीं थे।
योगी ने कहा कि दंगों और कर्फ्यू के कारण बाजार प्रभावित हुए तथा व्यापारियों, कारीगरों, छात्रों और महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ी।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल फरवरी या मार्च में होने प्रस्तावित हैं, जिसके मद्देनजर सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।