12 साल बाद अमरावती बना आंध्र प्रदेश की आधिकारिक राजधानी
अमरावती को 12 साल बाद आंध्र प्रदेश की आधिकारिक राजधानी घोषित किया गया। संसद से कानून पारित होने के बाद यह फैसला लागू हुआ, जिससे लंबे समय की अनिश्चितता समाप्त हुई।
करीब 12 साल के लंबे इंतजार के बाद अमरावती को आधिकारिक रूप से आंध्र प्रदेश की राजधानी घोषित कर दिया गया है। 6 अप्रैल 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना के तहत यह निर्णय आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) अधिनियम, 2026 के माध्यम से लागू किया गया।
अधिसूचना के अनुसार, अमरावती को 2 जून 2024 से प्रभावी रूप से राज्य की राजधानी माना जाएगा। इससे प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित होगी और राज्य के लिए राजधानी को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता समाप्त हो गई है।
2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद तेलंगाना राज्य का गठन हुआ था और हैदराबाद को दोनों राज्यों की अस्थायी संयुक्त राजधानी बनाया गया था। तब से ही नई राजधानी को लेकर बहस जारी थी।
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा, “आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती है।” यह घोषणा संसद में संशोधन विधेयक पारित होने के बाद की गई।
इस कानून ने 2014 के पुनर्गठन अधिनियम में संशोधन करते हुए स्पष्ट कर दिया कि अमरावती ही नई राजधानी होगी, जिससे हैदराबाद की अस्थायी राजधानी की व्यवस्था समाप्त हो गई।
यह निर्णय तब और मजबूत हुआ जब 28 मार्च को राज्य विधानसभा ने अमरावती के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया। इसके बाद 1 अप्रैल को लोकसभा और 2 अप्रैल को राज्यसभा ने विधेयक को मंजूरी दी।
मुख्यमंत्री नायडू ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह आंध्र प्रदेश के लोगों, विशेषकर अमरावती के किसानों की जीत है।
हालांकि, विपक्ष ने इस फैसले पर सवाल उठाए और इसे राजनीतिक कदम बताया।
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