वन, पर्वत और जलस्रोत आस्था के केंद्र हैं: अमित शाह ने जनजातीय संस्कृति और पहचान की सराहना की
दिल्ली में जनजातीय सांस्कृतिक समागम में अमित शाह ने कहा कि वन, पर्वत और जलस्रोत आस्था के केंद्र हैं। उन्होंने बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का भी उल्लेख किया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वन, पर्वत और जलस्रोत केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि ये जनजातीय समाज के लिए आस्था और संस्कृति के महत्वपूर्ण केंद्र भी हैं। वे रविवार को दिल्ली में आयोजित ‘जनजातीय सांस्कृतिक समागम’ को संबोधित कर रहे थे।
अपने संबोधन में अमित शाह ने आदिवासी समाज की समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर की सराहना की। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय ने सदियों से प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की अनोखी परंपरा को बनाए रखा है।
गृह मंत्री ने इस अवसर पर बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने उस दौर में जनजातीय समुदायों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जब संचार के आधुनिक साधन मौजूद नहीं थे।
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अमित शाह ने कहा कि बिरसा मुंडा का संघर्ष और योगदान आज भी देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने जनजातीय समाज को देश की सांस्कृतिक पहचान का मजबूत स्तंभ बताया।
कार्यक्रम में देशभर से आए जनजातीय कलाकारों और प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। इस आयोजन का उद्देश्य आदिवासी संस्कृति, कला और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना है।
शाह ने कहा कि सरकार जनजातीय समुदायों के विकास और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत है और जनजातीय संस्कृति इस विविधता को और समृद्ध बनाती है।
इस अवसर पर जनजातीय नृत्य, संगीत और पारंपरिक कला की झलक भी देखने को मिली, जिसने कार्यक्रम को और भी आकर्षक बना दिया।
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