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हर परिवर्तन बिना खून की एक बूंद बहाए स्वीकार हुआ: अमित शाह ने भारत की शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक परंपरा की सराहना की

अमित शाह ने तुषार मेहता की पुस्तक विमोचन में कहा कि भारत में सभी परिवर्तन बिना हिंसा के हुए हैं। उन्होंने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को वैश्विक स्थिरता का उदाहरण बताया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत में हर परिवर्तन बिना खून की एक बूंद बहाए स्वीकार किया गया है, जो देश की मजबूत लोकतांत्रिक परंपरा का प्रमाण है। वे वरिष्ठ अधिवक्ता और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दो पुस्तकों के विमोचन कार्यक्रम में बोल रहे थे।

इस अवसर पर अमित शाह ने भारत की बहुदलीय संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद से देश की लोकतांत्रिक प्रणाली लगातार परिपक्व हुई है। उन्होंने कहा कि भारत में सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण और विधायी परिवर्तन पूरी दुनिया के लिए स्थिरता और लोकतंत्र का एक आदर्श उदाहरण हैं।

गृह मंत्री ने कहा कि भारत का लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनता की भागीदारी और संस्थाओं की मजबूती पर आधारित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत ने समय के साथ न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत किया है, बल्कि उन्हें और अधिक पारदर्शी और प्रभावी भी बनाया है।

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अमित शाह ने यह भी कहा कि भारत में विभिन्न विचारधाराओं और राजनीतिक दलों के बावजूद लोकतंत्र ने हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से काम किया है। उन्होंने कहा कि यह भारत की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है कि यहां मतभेद होते हुए भी बदलाव संवैधानिक ढांचे के भीतर ही होते हैं।

कार्यक्रम में उन्होंने लेखक तुषार मेहता की पुस्तकों की भी सराहना की और कहा कि ये रचनाएं भारतीय न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह बयान भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने और उसकी उपलब्धियों को रेखांकित करने का प्रयास है। कार्यक्रम में कई गणमान्य व्यक्ति, न्यायिक अधिकारी और विद्वान उपस्थित रहे।

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