नए श्रम संहिताओं पर आंध्र प्रदेश सरकार ने मांगे सुझाव, श्रम विभाग ने हितधारकों से आमंत्रित की प्रतिक्रियाएं
आंध्र प्रदेश श्रम विभाग ने केंद्र सरकार द्वारा लागू चार नई श्रम संहिताओं पर हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। तय समय में मिली प्रतिक्रियाओं पर विचार कर नियम अंतिम किए जाएंगे।
आंध्र प्रदेश श्रम विभाग ने भारत सरकार द्वारा अधिनियमित चार नई श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन को लेकर हितधारकों से आपत्तियां, सुझाव और प्रतिक्रियाएं आमंत्रित की हैं। विभाग द्वारा जारी बयान में कहा गया कि ये सुधार व्यापक श्रम सुधार प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य श्रम कानूनों को सरल और आधुनिक बनाना है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, निर्धारित समय सीमा के भीतर प्राप्त सभी अभ्यावेदन और सुझावों की विस्तार से समीक्षा की जाएगी। इसके बाद ही नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि नई श्रम संहिताएं श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए राज्य में कारोबार को सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
चार नई श्रम संहिताओं में वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थितियां संहिता शामिल हैं। इनका उद्देश्य 29 पुराने श्रम कानूनों को समेकित कर एक सरल और पारदर्शी ढांचा तैयार करना है।
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श्रम विभाग ने उद्योग संगठनों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, श्रमिक संघों, श्रम कानून विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से अपील की है कि वे प्रस्तावित नियमों पर अपने विचार साझा करें। विभाग का मानना है कि व्यापक परामर्श प्रक्रिया से कानूनों का प्रभावी और संतुलित कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
सरकारी बयान में कहा गया कि श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम वेतन, कार्यस्थल पर सुरक्षा और औद्योगिक विवादों के समाधान से जुड़े प्रावधानों को मजबूत किया गया है। साथ ही, उद्योगों के लिए अनुपालन प्रक्रियाओं को आसान बनाने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा, ताकि श्रमिकों और नियोक्ताओं दोनों के हितों में संतुलन स्थापित किया जा सके।
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