एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक क्या है? जानिए 2024 के कानून से कितना अलग और छात्रों के लिए क्यों है अहम
सरकार ने एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पेश किया है। इसमें 10 साल की सजा, 10 करोड़ रुपये जुर्माना, फास्ट ट्रैक कोर्ट और समयबद्ध जांच जैसी कड़ी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
देशभर में नीट (यूजी) परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने लोकसभा में एंटी-पेपर लीक (संशोधन) विधेयक पेश किया है। इस विधेयक का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है। इसे प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में प्रस्तुत किया।
प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक जैसे अपराधों पर पहले से कहीं अधिक कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2024 के कानून में जहां दोषियों को तीन से पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान था, वहीं अब अधिकतम 10 वर्ष के कारावास का प्रस्ताव रखा गया है। जुर्माने की सीमा भी 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रावधान किया गया है।
नए विधेयक में प्रत्येक राज्य में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का प्रस्ताव है। इन अदालतों में रोजाना सुनवाई होगी और 90 दिनों के भीतर फैसला सुनाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही जांच पूरी करने के लिए दो महीने की समय-सीमा तय की गई है।
इसके अलावा, पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं की जांच के लिए विशेष स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) गठित करने का प्रस्ताव भी शामिल है। उच्च न्यायालय में अपील 30 दिनों के भीतर दाखिल करनी होगी और वहां भी तीन महीने के भीतर फैसला देने का लक्ष्य रखा गया है।
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष से इस विधेयक का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा कि यह राजनीति का नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने का समय है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल के दिनों में छात्रों को संबोधित करते हुए भरोसा दिलाया है कि पेपर लीक के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में छह सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति के गठन की घोषणा की है, जो परीक्षा प्रणाली में तकनीक आधारित सुधार, पारदर्शिता और दीर्घकालिक संरचनात्मक बदलावों की सिफारिश करेगी।
उधर, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी ने अंतरिम शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभाल लिया है। सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में भी बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए 47 अधिकारियों को सेवा से हटाया है। साथ ही यूपीएससी और एनटीए की परीक्षाओं में अनियमितताओं की जांच के लिए दिल्ली पुलिस ने भी विशेष एसटीएफ का गठन किया है। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए आगे भी व्यापक सुधार जारी रहेंगे।