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दुष्कर्म विरोधी कानून बनाने में एसजीपीसी और अकाल तख्त सचिवालय से सलाह नहीं ली गई: बीजेपी पंजाब उपाध्यक्ष फतेहजंग बाजवा

बीजेपी पंजाब उपाध्यक्ष फतेहजंग बाजवा ने आरोप लगाया कि दुष्कर्म विरोधी कानून बनाने में एसजीपीसी और अकाल तख्त से परामर्श नहीं लिया गया, जिससे विवाद बढ़ गया है।

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पंजाब के उपाध्यक्ष फतेहजंग सिंह बाजवा ने सोमवार को आरोप लगाया कि जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 को तैयार करते समय प्रमुख सिख संस्थाओं शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) और अकाल तख्त सचिवालय से कोई परामर्श नहीं लिया गया।

उन्होंने कहा कि अकाल तख्त ने पहले ही इस कानून को लेकर व्यापक परामर्श की आवश्यकता जताई थी, क्योंकि इसमें कई खामियां हैं और सिख समुदाय की प्रमुख धार्मिक संस्थाओं को प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया।

बाजवा ने आरोप लगाया कि कानून निर्माण की प्रक्रिया में सिख पंथ की भावनाओं और परंपराओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया, जिसके कारण यह विधेयक विवादों में घिर गया है। उन्होंने कहा कि धार्मिक मामलों से जुड़े किसी भी कानून को तैयार करने से पहले सभी संबंधित संस्थाओं से विस्तृत चर्चा जरूरी है।

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उन्होंने यह भी कहा कि सिख धर्म की सर्वोच्च धार्मिक सत्ता माने जाने वाले श्री अकाल तख्त की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, और किसी भी संशोधन या कानून में उसकी राय को शामिल करना अनिवार्य होना चाहिए।

इस बीच, इस मुद्दे को लेकर पंजाब की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष लगातार सरकार पर धार्मिक मामलों में एकतरफा निर्णय लेने का आरोप लगा रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि यह कानून धार्मिक भावनाओं की रक्षा और पवित्र स्थलों की सुरक्षा के लिए लाया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संवेदनशील कानूनों में धार्मिक संस्थाओं की भागीदारी से ही व्यापक सहमति और विवादों से बचाव संभव है। फिलहाल इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी जारी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।

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