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भविष्य के युद्धों की तैयारी कर रही है सेना, आत्मनिर्भरता के लिए स्वदेशीकरण जरूरी: थलसेनाध्यक्ष

थलसेनाध्यक्ष ने कहा कि भारतीय सेना भविष्य के युद्धों के लिए तैयार हो रही है और आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए स्वदेशी उपकरणों व अनुसंधान पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

थलसेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि भारतीय सेना स्वयं को भविष्य के युद्धों के लिए तैयार कर रही है और इसके लिए स्वदेशी उपकरणों का विकास एक रणनीतिक आवश्यकता बन चुका है। गुरुवार (15 जनवरी 2026) को जयपुर में सेना दिवस परेड के बाद उन्होंने कहा कि भारतीय सेना अब एक “फ्यूचर-रेडी फोर्स” के रूप में आगे बढ़ रही है, जिसमें अच्छी तरह प्रशिक्षित सैनिक, आधुनिक उपकरण और बहु-डोमेन ऑपरेशनल क्षमताएं शामिल हैं।

जनरल द्विवेदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सेना की सोच में स्पष्ट बदलाव आया है। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कहा कि इस अभियान ने एक “नया सामान्य” स्थापित किया और यह दिखाया कि भारतीय सेना तेजी, समन्वय और सटीकता के साथ जवाब देने में सक्षम है। यह एक परिपक्व और आत्मविश्वासी सेना का प्रतीक है, जो संतुलित और जिम्मेदार कार्रवाई के जरिए राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर सकती है।

उन्होंने कहा कि सेना केवल मौजूदा चुनौतियों से नहीं निपट रही, बल्कि भविष्य के युद्धों की भी तैयारी कर रही है। इसी दिशा में नई संरचनाएं बनाई जा रही हैं और उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुसार सुसज्जित और प्रशिक्षित किया जा रहा है। भैरव बटालियन और शक्ति बाण रेजिमेंट जैसी नई इकाइयों का गठन इसी सोच का परिणाम है, जो एक चुस्त, मिशन-उन्मुख और तेजी से प्रतिक्रिया देने वाली सेना को दर्शाता है।

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थलसेनाध्यक्ष ने कहा कि सेना दिवस परेड में परंपरा और परिवर्तन का सुंदर संगम देखने को मिला। ‘मेड इन इंडिया’ उपकरणों का प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि परिवर्तन की नींव आत्मनिर्भरता पर टिकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में सेना को ऐसे उपकरणों की जरूरत होगी, जो भारत में ही डिजाइन और विकसित किए गए हों।

उन्होंने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध ने दिखा दिया है कि किसी भी युद्ध की अवधि का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता। इसलिए अनुसंधान एवं विकास पर जोर देना बेहद जरूरी है, ताकि लंबी अवधि के युद्ध में देश आत्मनिर्भर रह सके। सूचना युद्ध में विश्वसनीयता को भी उन्होंने अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

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